1857 की क्रांति (1857 ki kranti) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में

1857 की क्रांति (1857 ki kranti) के बारे में इतिहासकारों के विचार अलग-अलग हैं| कुछ विद्वान मानते हैं, कि यह क्रांति किसान विद्रोह था| तो वहीं कुछ विद्वानों का मानना है कि, यह सैन्य विद्रोह है| परंतु इंडियन वार ऑफ इंडिपेंडेंस के अनुसार इसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में माना जाता था| 20वी सदी के शुरुआत में इतिहासकारों ने इसे वीर स्वतंत्रता सेनानियों के द्वारा किए गए संघर्ष के रूप में दिखाया गया|जो गदर के रूप में लिखी गई थी | कुछ का मानना है कि, मंगल पांडे ने कोलकाता के निकट बैरकपुर छावनी में विद्रोह किया| जो प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में परिवर्तित हो गया|

1857 की क्रांति (1857 ki kranti) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में
1857 की क्रांति (1857 ki kranti) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में

1857 की क्रांति (1857 ki kranti)

ब्रिटिश उपनिवेशक ने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की | जिसमें सेना की भूमिका महत्वपूर्ण थी| ब्रिटिश गवर्नर के जनरल वारेन वेस्टिंग ने अपने शासनकाल में ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा राज्यों के क्षेत्रों को अपने अधिकार में लेना शुरू कर दिया, और साथ ही साथ सेना का भी विस्तार करने लगे | इस प्रकार ब्रिटिश सेना में लगभग 80% सैनिक भारत के निवासी थे| भारत के सैनिकों को सिपाही का दर्जा दिया जाता था|

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1857 की क्रांति (1857 ki kranti) के तत्कालीन कारणो में एक भ्रम यह था कि 1853 में प्रयोग की जाने वाली राइफल की कारतूस के खोल पर सूअर और गाय की चर्बी चढ़ी हुआ करती थी| जिसके कारण हिंदू और मुस्लिम धर्मों के मध्य कट्टरपंथी फैल गई| 1857 की क्रांति के अनेक कारण थे| जिनमे से निम्न पर आज हम आपको जानकारी देंगे:-

1857 की क्रांति के राजनीतिक कारण

डलहौजी की साम्राज्यवादी नीति-

डलहौजी की साम्राज्यवादी नीति- सन 1848 से 1856 के मध्य डलहौजी ने भारत में अपना साम्राज्य बढाने लगा| जिसके लिए उसने विभिन्न प्रकार के अन्यायपूर्ण तरीके अपनाएं| जिसके कारण देसी रियासतों और नवाबों में ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध असंतोष फैल गया| डलहौजी ने इसे लेट्स का सिद्धांत कहा| जिस सिद्धांत के अनुसार “दो देशी रियासतें कंपनी के अधीन कार्य करती हैं| जिसके लिए उन्हें उत्तराधिकारी के रूप में राजा चुनने की स्वीकृति ब्रिटिश सरकार से लेनी होगी | यदि रियासतें ऐसा नहीं करेंगी तो उनके द्वारा चुने गए उत्तराधिकारी शासक बनने योग्य नहीं होंगे|”

इस नीति को आधार बनाकर डलहौजी ने निसंतान राजाओं को बच्चे गोद लेने पर रोक लगा दी| जिसके आधार पर डलहौजी ने सातारा, जैतपुर, जबलपुर, उदयपुर, नागपुर, झांसी, बाघभट्ट जैसी रियासतों पर कब्जा कर लिया| डलहौजी ने 1856 में अवध के नवाब पर कुशासन का आरोप लगाते हुए अवध को भी ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया| डलहौजी की यह नीति, भारत के राजाओं पर गहरा प्रभाव डाल रही थी| जिसके कारण भारत की जनता के मध्य विद्रोह की भावना फैल गई|

समकालीन परिस्थितियां-

समकालीन परिस्थितियां- भारत के लोग 1857 में ब्रिटिश सैनिकों को अपराजित मानते थे| लेकिन अफगानिस्तान और क्रीमिया से लड़े युद्ध में ब्रिटिश सैनिकों की हार हुई| इसी समय रूस ने क्रीमिया की पराजय का बदला लेने के लिए भारत पर आक्रमण करने का विचार बनाया| जिससे भारतवासियों में विद्रोह की भावना फैल गई| उन्होंने सोचा कि जब ब्रिटिश के सैनिक रूस के विरुद्ध युद्ध करने में व्यस्त होंगे| उसी समय देश में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह करके ब्रिटिश सरकार को भारत से भगा सकते हैं|

नाना साहब के साथ अन्याय-

नाना साहब के साथ अन्याय- डलहौजी ने बाजीराव के दूसरे पुत्र के दत्तक, नाना साहब के साथ अन्याय किया| डलहौजी ने नाना साहब की ₹800000 की पेंशन रुकवा दी| जिसके कारण नाना साहब ब्रिटिश शासन के शत्रु बन गए और 1857 में विलोव संगठन का नेतृत्व किया|

1857 की क्रांति (1857 ki kranti) के आर्थिक कारण

व्यापार का विनाश-

व्यापार का विनाश- ब्रिटिश सरकार ने भारत के लोगों का जमकर आर्थिक शोषण किया| और भारत में लूटमार करके अर्जित किए गए धन को इंग्लैंड भेज दिया| ब्रिटिश सरकार भारत से कच्चा माल की खरीदी करती और इंग्लैंड भेज देती| तथा इंग्लैंड में बने माल को लेकर भारत में बेचने लगे| जिसके कारण भारत धीरे-धीरे करके गरीब होने लगा और भारतीयों के उद्योग धंधे खत्म हो गए|

किसानों का शोषण-

किसानों का शोषण- ब्रिटिश शासन काल में भारत के किसानों की दशा बद से बदतर हो गई |और सभी प्रथाओं में किसानों का शोषण होने लगा|उनसे अधिक लगान वसूल किया जाए जाने लगा| जिसके कारण ब्रिटिश सरकार को लगान ना दे पाने के कारण भूमि नीलाम कर दी जाती थी|

1857 की क्रांति के सामाजिक कारण

ब्रिटिश शासन के द्वारा भारतीय समाज में हस्तक्षेप-

  • ब्रिटिश शासन के द्वारा भारतीय समाज में हस्तक्षेप- ब्रिटिश सरकार ने भारत के सामाजिक जीवन में भी हस्तक्षेप किया| जिसके परिणाम स्वरूप भारत के परंपरावादी और रूढ़वादी जनता क्रोधित हो गई| लॉर्ड विलियम बेंटिक ने देश में सती प्रथा को गैरकानूनी घोषित कर दिया और लॉर्ड कैनिंग ने विधवा विवाह की प्रथा लागू कर दी| इसके अतिरिक्त 1856 में पैतृक संपत्ति के संबंध में एक कानून बनाया गया| जिसके द्वारा हिंदुओं के उत्तराधिकारी नियम को बदल कर रख दिया गया| इस नियम के अनुसार “जो भी व्यक्ति ईसाई धर्म ग्रहण करेगा, वह अपनी पैतृक संपत्ति का हिस्सा पा सकता है”| भारतीय लोगों ने इस कानून का विद्रोह करने का निश्चय किया|

अंग्रेजी संस्कृति को प्रोत्साहन देना-

  • ब्रिटिश संस्कृति को प्रोत्साहन देना- अंग्रेजों ने अपनी संस्कृति का प्रचार प्रसार भारत में तेज कर दिया| भारतीयों को यूरोपीय चिकित्सा विज्ञान की ओर प्रेरित करने लगे| जिसके कारण भारतीय चिकित्सा विज्ञान ने विद्रोह करना शुरू कर दिया | इसके अतिरिक्त भारतीय जनता ने देश में फैलाए जाने वाले तार एवं रेल की पटरीयों को अपनी सभ्यता का विरुद्ध कार्य समझा| ब्रिटिश सरकार ने स्कूल, दफ्तर ,अस्पताल और सेना में भी ईसाई धर्म के प्रचार का केंद्र बना लिया| जिस कारण भारतीयों को लगने लगा कि, अब ब्रिटिश सरकार भारतीय संस्कृति को नष्ट कर देगी|

अंग्रेजी शिक्षा का प्रभाव-

  • अंग्रेजी शिक्षा का प्रभाव- ब्रिटिश सरकार ने भारतीय समाज की मूल शिक्षा प्रणाली को समाप्त कर दिया| जिसके कारण भारतीय सभ्यता के रहन-सहन, आचार-विचार, शिष्टाचार एवं व्यवहार, खानपान आदि में परिवर्तन आ गया| जिससे भारतीय समाज की मौलिकता नष्ट होने लगी| भारतीय जनता वैज्ञानिकों के प्रयोगों तथा नए- नए उपकरणों की खोज को भी अपनी सभ्यता के विरुद्ध मानने लगे|

भारतीयों से भेदभाव उत्पन्न करना-

भारतीयों से भेदभाव उत्पन्न करना- ब्रिटिश सरकार भारतीय लोगों को निम्न वर्ग के लोग समझते और उनसे नफरत करते थे| भारतीय नागरिकों को रेल के प्रथम श्रेणी डिब्बों में यात्रा करने का अधिकार नहीं था, और ना ही अंग्रेजी द्वारा चलाए जाने वाले होटल, क्लब में भारतीयों का प्रवेश होता था|

1857 की क्रांति (1857 ki kranti) के प्रशासनिक कारण

ब्रिटिश सरकार के अनेकों प्रकार के त्रुटिपूर्ण नीतियों के चलते भारत में अलग-अलग प्रकार की संस्थाओं की स्थापना होने लगी| जो भारतीय जनता के संस्थाओं से अलग थी| ब्रिटिश ने भारतियो के प्रति भेदभाव को अपनाते हुए प्रशासनिक सेवाओं से वंचित रखा, और भारतीयों को प्रशासन के उच्च सेवा अधिकारियों के रूप में अयोग्य माना| जिससे उन्होंंने प्रशासन में उच्च पद पर कार्य कर रहे भारतीयों को हटाकर ब्रिटिश व्यक्तियों को नियुक्त किया|ब्रिटिश सरकार ने अपने आप को न्याय के क्षेत्र में स्वयं को श्रेष्ठ मानने लगे| जिसके कारण भारतीय जज किसी भी अंग्रेज के विरुद्ध मुकदमे की सुनवाई नहीं कर सकता था|

1857 की क्रांति के सैनिक कारण

भारत के सैनिक ब्रिटिश के नीतियों के विरुद्ध थे| भारतीय सैनिकों को मिलने वाला वेतन, पदोन्नति, भत्ते आदि पक्षपातपूर्ण व्यवहार से दिया जाता था| सामान्यता एक सैनिक का वेतन 7 से ₹8 प्रति माह होता था| जिसमें वर्दी और खाने का खर्च निकाल देने के पश्चात सैनिकों के पास केवल एक या डेढ़ रुपए ही बच पाता था| भारतीय सैनिकों की तुलना में अंग्रेजी सैनिकों का मासिक वेतन 15 से ₹20 होता था| जबकि भारतीय सूबेदार का वेतन ₹35 और अंग्रेजी सूबेदार का वेतन ₹195 प्रतिमाह था| भारत की जनता, सेना में उच्च पद पर नियुक्त नहीं हो सकती थी| उच्च पद के लिए केवल ब्रिटिश नागरिक ही नियुक्त हो सकते थे| इन सभी कारणों से सैनिकों के मध्य पक्षपात विद्रोह उत्पन्न हो गया|

1857 की क्रांति की शुरुआत

1857 ki kranti की शुरुआत मंगल पांडे ने मेरठ की छावनी में आक्रमण करके की| 29 मार्च 1857 को मंगल पांडे ने ब्रिटिश के द्वारा प्रयोग की जाने वाली नई कारतूसो के विरुद्ध आवाज उठाई| उन्होंने कहा कि अंग्रेज सरकार जिन नए कारतूसो का उपयोग कर रही है| उनमें सूअर और गाय की चर्बी का प्रयोग होता है| जब मंगल पांडे को अंग्रेज अधिकारी पकड़ने के लिए आगे बढ़े तब मंगल पांडे ने अंग्रेज अधिकारियों को मार दिया| जिसके पश्चात 8 अप्रैल 1857 को मंगल पांडे को फांसी की सजा सुनाई गई| फांसी की सजा सुनकर संपूर्ण देश में विद्रोह और क्रांति का माहौल बन गया|

जिसके पश्चात मेरठ के सैनिकों ने जेलखानों को तोड़कर भारतीय सैनिकों को मुक्त कराया और अंग्रेजों को मारना शुरू कर दिया| भारतीय सैनिकों को मेरठ में मिली सफलता से उत्साहित होकर वे दिल्ली की ओर चले गए| दिल्ली आकर सैनिकों ने कर्नल रीप्ले को मार दिया और दिल्ली पर अपना अधिकार कर लिया| इसी प्रकार की घटनाएं अलीगढ़, गोरखपुर, आजमगढ़, बुलंदशहर आदि स्थानों पर भी हो चुकी थी|

क्रांति का दामन

1857 की क्रांति (1857 ki kranti) का व्यापक रूप देखकर अंग्रेजी सरकार ने निर्ममता पूर्वक दमन करने की रणनीति अपनाई| उसी समय वायसराय लॉर्ड कैनिंग ने यूरोपीय देश से अंग्रेजी सैनिक मंगवाई| जिसके पश्चात जर्नल नील के नेतृत्व में भारतीय सैनिकों को बनारस और इलाहाबाद में क्रूरता पूर्वक मारा गया| इस क्रांति में निर्दोष लोगों को भी फांसी की सजा सुनाई गई| 1857 की क्रांति में बहादुर शाह को अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर लिए जाने के पश्चात सभी स्थानों पर नरसंहार शुरू कर दिया गया|अंबाला, फुलवर जैसे स्थानों पर एक साथ कई लोगों की हत्या करवा दी गई| जो भी भारतीय सैनिक अंग्रेजों के नियमों का उल्लंघन करती थी, उनको तोप के मुंह में डालकर उड़ा दिया जाता था| पंजाब में भी अनेक सिपाहियों को अंग्रेजों ने घेर कर जिंदा जला दिया|

ब्रिटिश सरकार ने ना केवल सैनिकों के सहारे क्रांति को खत्म करना चाहा| बल्कि लोगों को लालच देकर बहादुर शाह को गिरफ्तार किया और उनके पुत्रों की हत्या कर दी| अंग्रेजों ने लोभ देकर सिख्खो और मद्रासी सैनिकों को अपने साथ मिला लिया| यदि सिख रेजीमेंट, अंग्रेजी सरकार की सहायता नहीं करती तो अंग्रेजी सरकार 1857 की क्रांति को रोक नहीं पाती|

क्रांति की असफलता के कारण

इस क्रांति की असफलता के प्रमुख कारण निम्नलिखित है

  • 1857 की क्रांति का विद्रोह असंगठित तथा सीमित था| विद्रोह में मुंबई और मद्रास की सेनाएं अंग्रेजों का पूर्ण रूप से समर्थन कर रही थी|
  • इस विद्रोह में अच्छे संसाधनों की कमी थी| जिसके कारण अंग्रेजी सैन्य बल के सामने भारतीय सैन्य बल कमजोर हो गए|
  • 1857 ki kranti में शिक्षित और व्यापारी वर्ग के लोगों ने अंग्रेजों का समर्थन किया और अंग्रेजों के लिए लेख तथा भाषण दिया करते थे|
  • इस विद्रोह में भारतीय समाज के सभी वर्गों का सहयोग नहीं मिल सका| पटियाला, हैदराबाद, ग्वालियर के राजाओ ने अंग्रेजों के साथ मिलकर इस विद्रोह को खत्म करने की कोशिश की|
  • 1857 की क्रांति के विद्रोहियों के पास कार्य करने की क्षमता, अनुभव आदि की कमी थी|
  • सैनिकों को आवागमन एवं संचार के साधन नहीं मिल सके| जिसके कारण अंग्रेजी सेना विद्रोह को असफल बनाने में सफल रही|

क्रांति के परिणाम

1857 ki kranti के परिणाम निम्नलिखित हैं

  • क्रांति समाप्त होने के पश्चात ब्रिटिश सरकार ने एक कानून बनाया और ईस्ट इंडिया कंपनी के अस्तित्व को समाप्त कर दिया | जिसके कारण भारत पर शासन करने का अधिकार महारानी विक्टोरिया के हाथों में चला गया|
  • भारत के स्थानीय लोगों के द्वारा उनके अधिकारों एवं गौरव को पुनः देने की बात की गई| भारतीय राजाओं को महारानी विक्टोरिया ने संधि प्रस्ताव का आश्वासन दिया| इस संधि के अनुसार भारतीय राजा अपने क्षेत्र के विस्तार के लिए दूसरे राजाओ या क्षेत्रों पर अतिक्रमण नहीं कर सकते और ना ही किसी धर्म का शोषण कर सकते थे|
  • 1857 की क्रांति के पश्चात अंग्रेजों ने यूरोपीय सैनिकों की संख्या बढ़ा दी| जिसमें भारतीय नागरिकों की नियुक्ति उच्च पद पर नहीं की जा रही थी| इस समय अंग्रेजों की सेना में भारतीय और अंग्रेजी सैनिकों का अनुपात 2 : 1 था| जबकि मद्रास और मुंबई में या अनुपात 3 : 1 था
  • क्रांति की समाप्ति के पश्चात साम्राज्यवादी नीति खत्म हो गई| परंतु आर्थिक शोषण का युग आरंभ हो गया|
  • देश में ईसाई धर्म के प्रचार प्रसार कम हो गया| मुगल साम्राज्य का अस्तित्व खत्म हो गया और श्वेत जाति के लोगों को अधिक सम्मान दिया जाने लगा|

दोस्तों आज हमने इस लेख में सन 1857 के क्रांति (1857 ki kranti) के बारे में जानकारी दी और क्रांति के क्या परिणाम हुए इस बारे में भी बातें की|आशा करता हूं कि आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी| आप अपनी राय हमारे कमेंट बॉक्स सेक्शन में जरूर बताएं| आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है|