Childhood And Growing up Notes in Hindi Download

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दोस्तों, आज हम आपको b.ed के पाठ्यक्रम को पढ़ने वाले उम्मीदवारों के लिए उनके विषय childhood and growing up पुस्तक के बारे में एक शार्ट नोट्स ले कर आए हैं। इस नोट्स के द्वारा आप childhood and growing up की तैयारी आसानी से कर सकते हैं। आपका ज्यादा समय न लेते हुए हम b.ed पाठ्यक्रम के इस पुस्तक के बारे में शॉर्ट नोट्स हिंदी में इस लेख के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहे हैं। Childhood and growing up notes को डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए लेख को अंत तक पढ़ें तथा दिए गए लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड करें।

Childhood And Growing up Notes in Hindi Download

childhood and growing up पुस्तक में विद्यार्थियों को निम्न अध्याय को पढ़ना होता है। पुस्तक में उपलब्ध सभी अध्याय निम्न है। जिनके शॉर्ट नोट्स आपको हमारे इस लेख में दिए गए हैं।

  1. मानव वृद्धि एवं विकास
  2. मानव विकास की अवस्थाएं
  3. शैशवावस्था में शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक तथा सामाजिक विकास
  4. बाल्यावस्था में शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक तथा सामाजिक विकास
  5. किशोरावस्था में शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक तथा सामाजिक विकास
  6. ज्यॉ पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत एवं उनके शैक्षिक निहितार्थ
  7. जेरोम ब्रूनर का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत एवं उनके शैक्षिक निहितार्थ
  8. विकास के प्रभावी कारक
  9. गर्भावस्था शिशु का विकास गर्भावस्था शिशु, गर्भावस्था और गर्भोत्तर कालीन विकास।
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नीचे हम अब अध्याय के अनुसार सभी अध्यायों के शार्ट नोट्स हिंदी में साझा कर रहे हैं।

Contents

मानव वृद्धि एवं विकास (Childhood And Growing up Notes

  • मानव में विकास का होना एक ऐसी विशेषता होती है। जिसका प्रारंभ गर्भावस्था से ही हो जाता है। यह विकास जीवन भर निरंतर चलता रहता है।
  • शरीर में विकास कि कुछ अवस्थाएं उम्र के साथ रुक जाती हैं। इन विकास को मानव वृद्धि कहते हैं। जबकि इसके विपरीत कुछ ऐसे विकास होते हैं जो अनेक प्रकार से लगातार होते रहते हैं।
  • सामान्य आधार पर आपको वृद्धि एवं विकास के बारे में जानकारी एवं उनके महत्व को जानना आवश्यक है।
  • सरल भाषा में कहें तो यदि शरीर के भौतिक रूप से विकास होता है तो उसे वृद्धि कहते हैं। जबकि मनुष्यों के आंतरिक अर्थात बौद्धिक एवं मानसिक स्तर पर विकास लगातार चलता रहता है। इस विकास को मानवीय विकास कहते हैं।
  • भौतिक विकास केवल शरीर के कुछ विभिन्न तत्व में वृद्धि के कारण होता है जबकि मानवीय विकास व्यक्तियों में समय के साथ ज्ञान अर्जित करने के साथ बढ़ता है।

मानव विकास की अवस्थाएं

  • मनुष्य में विकास की अवस्था भिन्न-भिन्न होती है। जैसा कि अध्याय 1 में बताया गया है कि मानव में वृद्धि एवं विकास होता है। वृद्धि भौतिक क्रिया है जबकि विकास एक आंतरिक क्रिया है। मानव विकास के लिए निम्नलिखित अवस्थाएं महत्वपूर्ण होती है।
  • मानव का विकास गर्भावस्था, शैशवावस्था, किशोरावस्था, बाल्यावस्था, व्यस्कावस्था, प्रौढ़ावस्था, मध्य अवस्था और वृद्धावस्था में होती है।
  • शैक्षणिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो मानव विकास के लिए बाल्यावस्था एवं किशोरावस्था दो विशेष अवस्थाएं हैं।
  • इन दोनों अवस्थाओं में व्यक्ति को आगे आने वाले जीवन के लिए आवश्यक व्यवहारों का प्रशिक्षण प्राप्त होता है।
  • मानव विकास की प्रत्येक अवस्था की अपनी एक विशेषता होती है तथा अवस्था विशेष के लिए अपने अपने विकासात्मक कार्य होते हैं।

शैशवावस्था में शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक तथा सामाजिक विकास

  • तीसरे अध्याय में मानव विकास के लिए शैशवावस्था के अंतर्गत होने वाले परिवर्तनों एवं लक्षणों का उल्लेख किया गया है।
  • शैशवावस्था जन्म के पश्चात की सबसे प्रथम एवं महत्वपूर्ण अवस्था होती है।
  • जब एक सामान्य शिशु शैशवावस्था में होता है तब उसका विकास सभी क्षेत्रों में सामान्य होता है।
  • इस अवस्था में रहकर शिशु अपने जीवन के महत्वपूर्ण समय को पूर्ण करते हुए अगली अवस्था में पहुंचता है।
  • शैशवावस्था में ही शिशु बोलना, चलना, समझना एवं समाज के नियम एवं कानून के अनुरूप यात्रा का प्रारंभ करता है।
  • इसी अवस्था में ही वह मुस्कुराना, हंसना, बातों का विरोध करना, प्रश्न पूछना आदि प्रकार के जिज्ञासा पूर्ण उत्सुकता को दर्शाता है।
  • वैलेंटाइन के अनुसार शैशवावस्था किसी भी प्रारूप को सीखने का एक आदर्श काल माना जाता है।
  • जबकि वाटसन के द्वारा कहे गए शब्दों के अनुसार ” शैशवावस्था में सीखने की सीमा और तीव्रता विकास की ओर किसी अवस्था की तुलना से बहुत अधिक होती है” ।

बाल्यावस्था में शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक तथा सामाजिक विकास
(Childhood And Growing up Notes)

  • शैशवावस्था के पश्चात अर्थात 6 वर्ष से लेकर 12 वर्ष तक की आयु को बाल्यावस्था कहते हैं।
  • बाल्यावस्था में बालक का लगभग पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक विकास हो जाता है।
  • इसी अवस्था में बालक सामाजिक कृतियों के भाव को जानने एवं समझने लगता है।
  • बाल्यावस्था में ही बालक अन्य सभी प्रकार की योग्यताओं को सीखने एवम सिखाने की प्रक्रिया अर्थात शिक्षा प्राप्त करता है।
  • बाल्यावस्था में शरीर में होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं संवेगात्मक परिवर्तन एवं विकास के लिए अनेक कार्य उत्तरदाई होते हैं।
  • बालक के इस उक्त विकास में सहयोगी बनने के लिए सभी पक्षों की विशेषता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा में उचित परिवर्तन किए जा सकते हैं।
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किशोरावस्था में शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक तथा सामाजिक विकास
(Childhood And Growing up Notes)

  • विकास की अवस्था में किशोरावस्था का एक अलग ही स्थान है।
  • किशोरावस्था वह समय होता है जिसमें विकास शील व्यक्ति बाल्यावस्था से निकलकर व्यक्ति बनने की ओर अग्रसर होता है।
  • इस अवस्था में बालक में होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं संवेगात्मक विकास को अनेक कारक प्रभावित करते हैं।
  • सामान्यता कहा जा सकता है कि मानव विकास के सभी क्षेत्र परस्पर एक-दूसरे से प्रभावित होते हैं।
  • किशोरावस्था मैं हुए परिवर्तनों को देखने के पश्चात जीवन का समय सबसे कठिन एवं नाजुक हो जाता है।
  • इस समय बालक के शिक्षा की दिशा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • किशोरावस्था में बालकों के मन एवं प्रौढ़ो के मन स्तर में बहुत भिन्नता होती है।

ज्यॉ पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत एवं उनके शैक्षिक निहितार्थ
(Childhood And Growing up Notes)

  • पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत मनोविज्ञान के विकास के क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
  • इस सिद्धांत के अनुसार बच्चों के क्रमिक विकास के बारे में जानकारी दी गई है।
  • पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के आधार पर विकास को चार अवस्था विभाजित किया गया है। जिसे संवेदी पेशीय अवस्था, पूर्व संक्रियात्मक अवस्था, मूर्त सक्रिय अवस्था और अनौपचारिक सक्रिय अवस्था कहते हैं।

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जेरोम ब्रूनर का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत एवं उनके शैक्षिक निहितार्थ
(Childhood And Growing up Notes)

  • जेरोम ब्रूनर ने विकास के लिए शिक्षा पर अधिक जोर दिया है।
  • ब्रूनर के बौद्धिक विकास के सिद्धांत के तीन चरण हैं। सक्रियता:- जहां एक व्यक्ति वस्तुओं पर प्रक्रिया के द्वारा दुनिया के बारे में सीखता है। प्रतिमा:- जहां व्यक्ति प्रति मानव एवं चित्रों के माध्यम से ज्ञान अर्जित करता है। सांकेतिक:- जहां व्यक्ति मूर्त रूप में चिन्हित करने की क्षमता एवं व्याख्यान करने का गुण सीखता है।

विकास के प्रभावी कारक (Childhood And Growing up Notes)

  • शिक्षा के द्वारा हम बच्चों में सर्वांगीण विकास की कल्पना करते हैं।
  • व्यक्तित्व के विकास के लिए अनुवांशिकता तथा अंतः स्रावी ग्रंथियों की रचना पर आश्रित होते हैं।
  • किसी भी व्यक्ति को मिलने वाली सफलता एवं असफलता उसके बौद्धिक क्षमता एवं व्यक्ति के आकांक्षा स्तर महत्वपूर्ण होते हैं।
  • शिक्षकों का सदैव कार्य होना चाहिए कि वे बच्चों में बौद्धिक क्षमता को इस प्रकार विकसित करें कि उन्हें असफलता प्राप्त ना हो।

गर्भावस्था शिशु का विकास गर्भावस्था शिशु, गर्भावस्था और गर्भोत्तर कालीन विकास।

  • किसी भी बालक की शिक्षा का प्रारंभ माता के गरबे मैं आने वा उससे पूर्व ही शुरू हो जाता है।
  • गर्भावस्था में कई ऐसे कारक हैं जो बालक को प्रभावित करते हैं जैसे मां किस वातावरण में रह रही है, माता का स्वभाव, स्वस्थ माता का पोषण आदि।
  • गर्भावस्था अवधि में शिशु का विकास तीन अवस्थाओं में होता है। डिंबा अवस्था, भ्रूण अवस्था, गर्भाशय शिशु (मिजने की अवस्था)
  • इस अवस्था में शिशु का शारीरिक विकास, क्रियात्मक विकास, भाषा का विकास, बुद्धि का विकास, एक निश्चित समय से चलता रहता है।

दोस्तों, childhood and growing up notes की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारे द्वारा दी गई लिंक पर क्लिक करें और इस पुस्तक को डाउनलोड करें। हमारे द्वारा इस पुस्तक के शार्ट नोट्स जारी किए गए हैं।

frequently asked questions (FAQs)

  • childhood and growing up notes in Hindi कैसे डाउनलोड करें?
    उत्तर:- इस पुस्तक को डाउनलोड करने के लिए हमारे लेख में दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
  • b.ed की पुस्तक childhood and growing up notes in Hindi के अध्याय कौन-कौन से हैं?
    उत्तर:- पुस्तक की सभी अध्याय हो एवं उनके शार्ट नोट्स के लिए हमारे लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।
  • वृद्धि एवं विकास क्या है?
    उत्तर:- भौतिक परिवर्तन को वृद्धि तथा शरीर के आंतरिक भागों अर्थात बौद्धिक एवं मानसिक वृद्धि को विकास कहते हैं।
  • बच्चों में विकास एवं वृद्धि की अवस्था क्या होती है?
    उत्तर:- बच्चों में वृद्धि एवं विकास की अवस्था गर्भावस्था से शुरू होकर किशोरावस्था तक होती है। अधिक जानकारी के लिए लेख को अवश्य पढ़ें।
  • विकास को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं?
    उत्तर:- बालकों के विकास को प्रभावित करने वाले कारक सामाजिक एवं शैक्षणिक कारक मुख्य माने जाते हैं।

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