Harappan Civilization in Hindi सम्पूर्ण जानकारी।

दोस्तों आज के आर्टिकल में हम आपको भारत से जुड़ी हुई कुछ सभ्यताओं के बारे में बताएंगे जिसमें से एक सभ्यता है, हड़प्पा की सभ्यता (Harappan Civilization)| जिसके इतिहास के बारे में हम विस्तार से बात करेंगे| यह सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता का एक हिस्सा है|

आज के आर्टिकल में अब जानेंगे कि Harappan Civilization का विस्तार कैसे हुआ? इसकी नगर योजना कैसी थी? लोगों की अर्थव्यवस्था उनके पहनावे, कला, पूजा, उनके लिखने की लिपि, वह कौन सा धर्म मानते थे? इन सभी विषयों के बारे में पूरी जानकारी देंगे|

Harappan Civilization in Hindi सम्पूर्ण जानकारी।

क्या आप जानते हैं, कि हड़प्पा संस्कृति (Harappan Civilization) भारत की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है| हड़प्पा और मोहनजोदड़ो पंजाब के मॉटेगोमेरी जिले (जो अब पाकिस्तान में स्थित है) से जुड़ी हुई है |हड़प्पा सभ्यता वर्तमान शताब्दी के तीसरे दशक में आयोजित की गई थी| हड़प्पा की संस्कृति में बहुत से रहस्य दबे हुए हैं| इन सभी रहस्यों के बारे में आज हम बात करेंगे|हड़प्पा सभ्यता

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हड़प्पा सभ्यता(Harappan Civilization) का विस्तार:-

हड़प्पा सभ्यता(Harappan Civilization) एक नगरीय सभ्यता वाली सभ्यता थी| जहां पर कुछ चिन्हों के दौरान सात भिन्नताए पाई जाती हैं| मोहनजोदड़ो सभ्यता के विनाश के दौरान हड़प्पा सभ्यता ने मोहनजोदाडो के शहर को पुनः विकसित किया| उस समय हड़प्पा सभ्यता (Harappan Civilization) शहरी जीवन की ओर प्रगतिशील था|

Harappan Civilization के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें :-

  • हड़प्पा सभ्यता के अवशेष सिंधु घाटी नदी के किनारे एवं उनकी सहायक नदियों के क्षेत्र के किनारे मिलते है|
  • भारत के इतिहास में पाई जाने वाली सभ्यताएं सिंधु घाटी सभ्यता से प्रारंभ होती हैं इसे हम हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जानते हैं|
  • यहां लगभग 2500 ईसा पूर्व दक्षिण एशिया के पश्चिमी भागों में फैली हुई थी| जो अब पाकिस्तान तथा पश्चिमी भारत के नाम से जाना जाता है|
  • सिंधु घाटी सभ्यता मिस्र मेसोपोटामिया भारत और चीन की सबसे बड़ी प्राचीन नगरी सभ्यताओं में से अधिक उन्नति वाली सभ्यता है|
  • भारतीय पुरातत्व विभाग के द्वारा सन 1920 में सिंधु घाटी के किनारे खुदाई करते वक्त हड़प्पा और मोहनजोदड़ो संस्कृति के दो प्राचीन नगर के अवशेषों की खोज की गई|
  • सन 1924 में भारतीय पुरातत्व विभाग ने सिंधु घाटी सभ्यता की एक नई सभ्यता की खोज की घोषणा की|

हड़प्पा सभ्यता(Harappan Civilization) की सभ्यता :-

हड़प्पा सभ्यता के तीन चरण हैं|
1- प्रारंभिक हड़प्पा सभ्यता (3300 ई.पू. – 2600 ई.पू.तक)
2- परिपक्व हड़प्पा सभ्यता (2600 ई.पू. – 1900 ई.पू.तक)
3- उत्तर हड़प्पा सभ्यता (1900 ई.पू. – 1300 ई.पू.तक)

1- प्रारंभिक हड़प्पा सभ्यता (3300 ई.पू. – 2600 ई.पू.तक)

  • प्रारंभिक हड़प्पा सभ्यता हकरा चरण से संबंधित है जिसे घग्गर हकरा नदी घाटी में खोजा गया था|
  • हड़प्पा सभ्यता की लिपि का प्रथम उदाहरण लगभग 3000 ईसा पूर्व के समय का मिलता है|
  • इस चरण की विशेषता यह है कि यह एक केंद्रीय इकाई पर ज्यादातर निर्भर रहते थे|
  • इस चरण में हड़प्पा सभ्यता के लोग नगर की सीमा को बढ़ाने की कोशिश करते थे|
  • व्यापार के क्षेत्र में हड़प्पा की प्रारंभिक सभ्यता के समय अधिक विकसित हो चुका था|
  • खेती भी इस सभ्यता में अधिक मात्रा में की जाती थी जिसमें मटर, तेल, खजूर, रुई आदि चीजों की खेती होती थी|

2- परिपक्व हड़प्पा सभ्यता (2600 ई.पू. – 1900 ई.पू.तक)

  • परिपक्व हड़प्पा सभ्यता के चरण कोटदीजी नामक स्थान पर पाए गए थे|
  • 2600 ईसा पूर्व तक सिंधु घाटी सभ्यता अपनी परिपक्व अवस्था में पहुंच चुकी थी|
  • परिपक्व हड़प्पा सभ्यता के आने तक प्रारंभिक हड़प्पा सभ्यता बड़े-बड़े नगर केंद्र में परिवर्तित हो चुके थे|
  • जैसे हड़प्पा और मोहनजोदड़ो, वर्तमान पाकिस्तान में तथा लोथल में स्थित थे| जो कि वर्तमान में भारत के गुजरात राज्य में स्थित है|

3- उत्तर हड़प्पा सभ्यता (1900 ई.पू. – 1300 ई.पू.तक)

  • 1800 ईसा पूर्व के समय को हड़प्पा सभ्यता के पतन का आरंभ माना जाता है|
  • 1700 ईशा पूर्व का समय आते-आते हड़प्पा सभ्यता के कई बड़े शहर समाप्त हो चुके थे|
  • प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के बाद की संस्कृति में भी हड़प्पा संस्कृति के कुछ तत्व दिखाई देते हैं|
  • कुछ पुरातात्विक आंकड़ों के अनुसार उत्तर हड़प्पा काल 1000 ईसा पूर्व से 900 ईसा पूर्व के बीच का बताया जा रहा है|

Harappan civilization की नगरी योजना एवं उनका विन्यास:-

  • हड़प्पा सभ्यता अपने बेहतरीन नगरी योजना प्रणाली के लिए जानी जाती है|
  • मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के नगरों में अपने-अपने दुर्ग थे| जो नगर से कुछ ऊंचाई पर बने हुए थे| इन दुर्ग में उच्च वर्ग के लोग ही निवास करते थे|
  • नगर में बनाए गए दुर्ग नीचे ईटों से बनी हुई नगर होती थी| जिनमें सामान्य लोग निवास करते थे|
  • हड़प्पा सभ्यता की एक खास बात यह है कि इस सभ्यता में ग्रिड प्रणाली मौजूद थी| जिसके अंतर्गत सड़कें एक दूसरे को समकोण पर काटती थी|
  • इस सभ्यता में अन्य भंडारों के लिए एक अन्य नगर का निर्माण किया जाता था|
  • हड़प्पा सभ्यता में प्रयोग की जाने वाली ईट भट्टी में जलाकर उपयोग में लाई जाती थी|
  • जबकि समकालीन मिस्र की सभ्यता में मकानों के लिए प्रयोग की जाने वाली ईटें शुष्क होती थी|
  • हड़प्पा सभ्यता में जल निकासी की प्रणाली बहुत कारगर थी|
  • हर छोटे और बड़े कमरों के अंदर एक स्नान ग्रह और आंगन होता था|
  • कालीबंगा के बहुत से घरों में कुवे नहीं पाए जाते थे|
  • इनके कुछ स्थान जैसे लोथल और धोलावीरा में संपूर्ण विन्यास मजबूत और नगर दीवारों द्वारा अलग-अलग भागों में विभाजित किए जाते थे|

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पहनावा:-

  • हड़प्पा सभ्यता के लोग को कॉटन और ऊन से बने कपड़ों के पोशाक पहनते थे|
  • वह कपड़े का उपयोग दो अलग-अलग हिस्सों में करते थे जो शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से को ढकने में मदद करता था|
  • हड़प्पा सभ्यता की महिलाएं अपने बालों की लट को रिबन के द्वारा बांधती थी|
  • वे अपने बालों को कपड़े से ढकने तथा गहने पहनना पसंद करते थे|

कृषि:-

  • हड़प्पा संस्कृति के गांव मुख्यता प्लावन मैदानों के पास होते थे| जो पर्याप्त मात्रा में अनाज का उत्पादन करते थे|
  • गेहूं , जौ, सरसों, तिल, मसूर आदि फसलों का उत्पादन होता था| गुजरात के कुछ स्थानों में बाजरा भी उगाने के संकेत मिलते हैं|
  • सिंधु घाटी सभ्यता के मनुष्यों ने सबसे पहले कपास की खेती की शुरुआत की थी|
  • मोहरो और टेराकोटा की मूर्तियों पर साड़ के चित्र उभरे हुए मिलते हैं, तथा पुरातात्विक खुदाई में बैलों से जोतते हुए चित्र के अंश मिलते हैं|
  • हड़प्पा संस्कृति के अधिकतम स्थान अर्ध शुष्क क्षेत्रों में मिले हैं| जहां खेती के लिए सिंचाई की आवश्यकता होती है|
  • नहरों के अवशेष हड़प्पा संस्कृति के अफगानिस्तान प्रांत में पाए गए हैं|यह अवशेष पंजाब और सिंध राज्यों में नहीं है|
  • हड़प्पा के लोग कृषि के साथ बड़े पैमाने पर पशु पालन भी करते थे|
  • मोहनजोदड़ो और लोथल में संयुक्त रूप से टेराकोटा की मूर्तियों पर घोड़े के कुछ चित्र मिले हैं| जिससे इनमें पशुपालन करने के तथ्य मौजूद हैं|

अर्थव्यवस्था

  • सिंधु घाटी में खुदाई के दौरान अनगिनत संख्या में मिली मोहरे इस बात के संकेत देती हैं कि हड़प्पा संस्कृति में लोग अपना जीवन यापन करने के लिए व्यापार को अधिक महत्व देते थे|
  • यह लोग पत्थर, धातु, सीपी या संख का व्यापार करते थे|
  • इस सभ्यता में धातु की मुद्रा का प्रयोग नहीं होता था| ये व्यापार की वस्तुओं को विनिमय प्रणाली से चलाते थे|
  • अरब सागर के तट पर उनके पास कुशल नौवहन प्रणाली भी मौजूद थी|
  • इन्होंने उत्तरी अफगानिस्तान में अनेक व्यापारिक बस्तियां बसा ली थी| जहां से प्रमाणित रुप से मध्य एशिया में आसानी से व्यापार किया जाता था|
  • दजला-फरात नदियों की भूमि वाले क्षेत्र से हड़प्पा वासी अधिक व्यापार कमाते थे|
  • हड़प्पा वासी प्राचीन लेपिस लजूली मार्ग से व्यापार करते थे जो उच्च लोगों की सामाजिक पृष्ठभूमि होती थी|

शिल्प कला:-

  • इस सभ्यता में कांसे की बनी वस्तुओं का उपयोग होता था इस सभ्यता के लोग कांसे का उपयोग भली भांति जानते थे|
  • तांबा राजस्थान की खेतड़ी खान से प्राप्त किया जाता था और अफगानिस्तान से लाया जाता था|
  • बुनाई के उद्योग में प्रयोग किए जाने वाले थप्पे बहुत सी वस्तुओं पर के रूप में प्रयोग होती थी|
  • बड़ी-बड़ी ईट निर्मित संरचनाओं से राजगीर महत्वपूर्ण शिल्प कलाएं बनाते थे|
  • हड़प्पा वासी नाव बनाने, मनका बनाने, मोहर बनाने की विधि भली भांति जानते थे |टेराकोटा की मूर्तियों का निर्माण हड़प्पा सभ्यता की महत्वपूर्ण शिल्प कला की विशेषता बताती है|
  • इन सभ्यता के जौहरी सोने चांदी और कीमती पत्थरों से आभूषण का निर्माण करते थे|
  • मिट्टी के बर्तन बनाने की विधि पूर्णता हड़प्पा संस्कृति में प्रचलित थी हड़प्पा के लोग चमकदार बर्तनों का निर्माण करते थे|

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धर्म:-

  • हड़प्पावासी वृक्षों तथा पशुओं की पूजा करते थे|
  • ये अत्यधिक मात्रा में ताबीज का प्रयोग करते थे|
  • पुरुष देवता के रूप में मोहरों पर तीन श्रृंगी चित्र पाए गए हैं, जो हड़प्पा वासियों के देवता माने जाते हैं|
  • देवता के एक तरफ हाथी, एक तरफ बाघ, एक तरफ गैंडा और उनके सिंहासन के पीछे भैंस का चित्र बनाया गया है |इन्हें ही पशुपतिनाथ महादेव की संज्ञा दी गई है|
  • हड़प्पावासी पृथ्वी को अपनी देवी के रूप में पूछते थे|

Harappan civilization का पतन:-

  • Harappan civilization लगभग 1800 सौ ईसा पूर्व में खत्म हो गया था परंतु इस के पतन के कारण अभी भी स्पष्ट नहीं है|
  • अलग-अलग सिद्धांतों की माने तो यूरोपियन जनजाति ने हड़प्पा सभ्यता पर आक्रमण करके उन्हें हरा दिया और सिंधु घाटी सभ्यता का पतन कर दिया|
  • कुछ पुरातत्वविद लोगों का मानना है, कि सिंधु घाटी सभ्यता का पतन का कारण प्रकृति है|
  • प्राकृतिक आपदाओं के कारण भी सिंधु घाटी की सभ्यता का पतन माना जाता है|
  • जलवायु में परिवर्तन एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं को भी सिंधु घाटी सभ्यता का पतन का जिम्मेदार माना जाता है|