Human Teeth Notes in Hindi. Full information about Teeth

Human Teeth Notes in Hindi:- दोस्तों, मनुष्य की खूबसूरती उसके चेहरे की बनावट से होती है| यदि किसी मनुष्य के चेहरे की बनावट सही नहीं होती तो, मानव की सुंदरता कम हो जाती है| मानव के चेहरे की सुंदरता बनाने के लिए मुख में उपस्थित दांत भी अहम योगदान निभाते हैं| ये दांत जबड़ो में एक समान संरचना और पैटर्न के अनुसार लगे होते हैं| जिसके कारण मनुष्य की चेहरे की बनावट की सुंदरता बढ़ जाती है। आज के लेख में हम आपको मानव दांत से संबंधित संपूर्ण जानकारी विस्तृत रूप से देंगे| इसलिए आज के लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

Human Teeth Notes in Hindi. Full information about Teeth

दांत की स्थिति (Human Teeth Notes in Hindi)

मानव दांत, मुंह के जड़ों में स्थित सफेद रंग की छोटी-छोटी संरचनाएं होती हैं| जो प्रायः कशेरुक प्राणियों में उपस्थित होते हैं| मानव शरीर मे दांत, दो जबड़े मे एक निश्चित पैटर्न के रूप में पाए जाते हैं| यह दांत मसूड़ों से मनुष्य के दांत हड्डियों के नहीं बने होते, बल्कि यह अलग-अलग मांसपेशियों के कठोरता एवं उनके घनत्व से बने होते हैं।

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डिपायोडॉन्ट और पॉलीफायोडॉन्ट

सभी मनुष्य तथा अन्य स्तनधारियों में उनके जीवनकाल में दो बार दांत निकलते हैं|जिसे दूध के दांत और स्थाई दातों में विभाजित किया जाता है| जीवन काल में दो बार दांत निकलने की प्रक्रिया को डिपायोडॉन्ट (diphydenton) कहते है|

कुछ कशेरुक जिनमें उनके जीवन काल में कई बार दांत उगते हैं| उन्हें पॉलीफायोडॉन्ट (Polyphydenton) कहा जाता है। केवल कुछ स्तनधारी जैसे हाथी, कंगारू और manatees मैं भी उनके जीवनकाल में कई बार दांत होते हैं।

दांत के प्रकार (Human Teeth Notes in Hindi)

मानव दांत वर्ष भर में 2 बार निकलते हैं, और ये दो प्रकार के होते हैं।

  1. अस्थाई दांत:- इसे दूध के दांत भी कहते हैं। अस्थाई दांत तीन प्रकार के होते हैं। इनकी कुल संख्या 20 होती हैं|जो निम्न है-
    1- कृन्तक :- इनकी संख्या 8 (4 ऊपरी जबड़ो में, 4 निचले जबड़ो में) होती हैं|
    2-भेदक (रदनक) :- इनकी संख्या 4 (2 ऊपरी जबड़ो में, 2 निचले जबड़ो में) होती हैं|
    3-अग्रचर्वणक :- इनकी संख्या 8 (4 ऊपरी जबड़ो में, 4 निचले जबड़ो में) होती हैं|
  2. स्थाई दांत:- यह दूध के दांत टूटने के पश्चात निकलते हैं, और जीवन भर रहते हैं। स्थाई दांत चार प्रकार के होते हैं। जो निम्न है-
    1- कृन्तक
    3- भेदक (रदनक)
    2-अग्रचर्वणक
    3- चर्वणक

स्थाई दांत:- (Human Teeth Notes)

ये दांत जीवन में एक बार निकलते हैं| इनकी संख्या 16 होती हैं|किन्तु जब 4 दूध के दांत , 5 से 8 वर्ष के बीच में टूट जाते हैं| तो इनकी कुल संख्या 32 हो जाती है| जिसे

  1. कृन्तक/ छेदक / Incisor:- मानव मुख के सामने के जबड़ो के मध्य में ये दांत पाए जाते हैं|इनकी संख्या 8 (4 ऊपरी जबड़ो में, 4 निचले जबड़ो में) होती हैं|
  2. भेदक (रदनक)/ Canine:- ये दांत कृन्तक के बाद/पीछे पाए जाते हैं|इनकी संख्या 4 (2 ऊपरी जबड़ो में, 2 निचले जबड़ो में) होती हैं|
  3. अग्रचर्वणक/ Premoler:- ये दांत भेदक (रदनक) के बाद/पीछे पाए जाते हैं| इनकी संख्या 8 (2 ऊपरी जबड़ो में, 2 निचले जबड़ो में) होती हैं|
  4. चवर्णक / Moler:- ये दांत अग्रचर्वणक के बाद/पीछे पाए जाते हैं| इनकी संख्या 12 (6 ऊपरी जबड़ो में, 6 निचले जबड़ो में) होती हैं|

दन्त विन्यास और उगने की उम्र:-

दन्त विन्यास (अस्थाई दांत):-
कृन्तक (2), भेदक (1), अग्रचर्वणक (0), चवर्णक (2) X 2 = 10 (ऊपरी जबड़ो में)
कृन्तक (2), भेदक (1), अग्रचर्वणक (0), चवर्णक (2) X 2 = 10 ( निचले जबड़ो में)
कुल दांत = 10 x 2 = 20 दांत


दन्त विन्यास (स्थाई दांत):-
कृन्तक (2), भेदक (1), अग्रचर्वणक (2), चवर्णक (3) X 2 = 16 (ऊपरी जबड़ो में)
कृन्तक (2), भेदक (1), अग्रचर्वणक (2), चवर्णक (3) X 2 = 16 ( निचले जबड़ो में)
कुल दांत = 16 x 2 = 32 दांत
नोट:- दन्त विन्यास से जुड़े प्रश्न लगभग सभी प्रतियोगिता परीक्षा में पूछे जाते हैं|

दांत के नाम उगने की उम्र (अस्थाई दांत)उगने की उम्र (स्थाई दांत)
कृन्तक6 से 9 मास (नीचे के मध्य छेदक)
8 से 10 मास (ऊपर के छेदक)
पहले छह महीने में
भेदक16 से 20 मासपहले छह महीने में
अग्रचर्वणकतीसरे या चौथे वर्ष
चवर्णक15 से 21 मास (प्रथम चर्वणक)
20 से 24 मास ( द्वितीय चर्वणक)
जन्म के समय (प्रथम चर्वणक)
चौथे वर्ष (दवितीय चर्वणक)
दसवें वर्ष के लगभग ( तृतीय चर्वणक)

दांत के कार्य एवं आकार:- (Human Teeth Notes)

दांत के नाम कार्य आकार
कृन्तकखाद्य पदार्थो को काटने के लिएधारदार , चपटे और चौड़े (सामने के दांत)
भेदकखाद्य पदार्थ जैसे मछली मांस आदि को चीरने एवं फाड़ने के लिएशंकुरूप, नुकीले
अग्रचर्वणकभोजन को पीसने तथा चबाने के लिएऊपर से चौड़े तथा आकार में छोटे
चवर्णकभोजन को पीसने तथा चबाने के लिएऊपर से चौड़े तथा आकार में छोटे

दांत की संरचना:-

दन्त का विकास जर्म स्तर की ऊतक, मेसोडार्म (Mesodarm) के द्वारा होता है| दांत के विकास की प्रक्रिया एक जटिल प्रक्रिया है| इस प्रक्रिया को Odentogensis कहते हैं| इस प्रक्रिया में मेसोडार्म (Mesodarm) से दांतों की संरचना एवं दांत के मध्य में पाए जाने वाले दंतमज्जा का निर्माण होता है| जबकि अन्य भागों का निर्माण एपीडर्म (Epidarm) से होता है।

दांत को तीन भागो में बाँटा जाता हैं|
1- Crown (शिरा)
2- Neck (गर्दन)
3- Root (जड़)

1- Crown (शिरा) (Human Teeth Notes)

यह बात के सबसे ऊपरी भाग का हिस्सा होता है |जो इनेमल से बना हुआ होता है| इस भाग को दंत शिखर के नाम से भी जाना जाता है। इनेमल दांत का सबसे कठोर हिस्सा होता है| जो दंत के ऊपरी भाग को मजबूत बनाता है| इनेमल फास्फेट, मैग्नीशियम फास्फेट, कार्बोनेट तथा कैल्शियम क्लोराइड से बना हुआ होता है। कैल्शियम उपस्थित होने के कारण या काफी मजबूत हो जाता है।

2- Neck (गर्दन) (Human Teeth Notes)

यह crown(शिरा) और root (जड़) में बीच का भाग होता हैं|इस भाग में इनेमल (Enamal) के जैसे ही दूसरा भाग होता हैं|जिसे Detine (डेनटाइन) कहते हैं| यह भाग इनेमल (Enamal) से कोमल होता है| यह मेसोडार्म (Mesodarm) से बना हुआ होता हैं| इस भाग में रक्तवाहिकाएँ, लसिकावाहिकाएँ तथा तंत्रिकाएँ के कुछ भाग पाए जाते हैं|

3- Root (जड़) (Human Teeth Notes)

दांत का यह भाग दोनों ओर से मसूड़ों से घिरा हुआ होता है। यह भाग अन्य भागों से कोमल होता है। इस भाग में रक्त वाहिकाएं , लसीका वाहिकाएं तथा तंत्रिकाए उपस्थित होती हैं, जो दांतों को सजीव बनाती हैं।

दांतों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें

दांतों को स्वस्थ रखने के लिए उनकी देखभाल करना आवश्यक होता है| इसके लिए मनुष्य को निम्न बातों का ध्यान रखना आवश्यक है-(Human Teeth Notes)

  • सुबह और शाम टूथपेस्ट और ब्रश से दांतो की सफाई करें।
  • भोजन करने के पश्चात दांतों और मसूड़ों की भली-भांति सफाई करें।
  • प्रत्येक माह प्रयोग किए जाने वाले टूथब्रश को बदलते रहे।
  • दातों में फंसे खाने के टुकड़े को कुल्ला करके बाहर निकाले।
  • दांतो के व्यायाम के लिए गन्ना , कच्ची सब्जियां या फल आदि खाने लाभदायक है।
  • दांतों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार तथा विटामिन से भरपूर भोजन का उपयोग करें।
  • दातों में किसी प्रकार की समस्या होने पर दंत चिकित्सक के पास दांत उखड़वाना अच्छा होता है।

दांत संबंधी रोग (Human Teeth Notes in Hindi)

दांतो का क्षय

मनुष्य में दांतो के क्षय जैसी बीमारी सामान्य बीमारी मानी जाती है। यह बीमारी जीवाणुओं के संक्रमण के द्वारा दांतो के ऊतकों में छिद्र करने के कारण होती है। दांतों के क्षय की बीमारी प्रायः दो जीवाणुओं के कारण होती है। जब यह दो जीवाणु (स्ट्रैप्टॉकोक्कस म्युटान्स और लैक्टोबैसिलस) दांतो के संपर्क में आते हैं, तो यह धीरे-धीरे दांत के इनेमल भाग पर संक्रमण करके उन्हें नष्ट करने लगते हैं| जिसके कारण दांतो का क्षय होने लगता है। इस रोग के इलाज के लिए व्यक्ति को डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

स्कर्वी

मनुष्यों में यह रोग विटामिन सी की कमी से होता है। इस रोग में मानव के दांतो एवं मसूड़ों के मध्य दूरियां बढ़ जाती हैं, और मसूड़ों से लगातार रक्तस्राव होने लगता है जिससे मनुष्य को दर्द होता है। इस रोग के इलाज के लिए मनुष्य को विटामिन सी से भरपूर फल जैसे संतरे, नींबू, आम इत्यादि फलों का सेवन करना चाहिए। इसके अतिरिक्त मनुष्य को इस रोग के निदान के लिए डॉक्टर से सलाह लेना भी आवश्यक है।