Indus Valley Civilization से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी UPSC के लिए।

सिंधु सभ्यता क्या है:– दोस्तों, आज के इस लेख में हम अपने देश की प्राचीन सभ्यता के बारे में बात करेंगे|यह सभ्यता हमारे देश में 3500 ईसा पूर्व में उद्भव हुआ था|सिंधु नदी के किनारे पाए जाने के कारण इस सभ्यता का नाम सिंधु घाटी सभ्यता ( Indus Valley Civilization ) रखा गया|

Indus Valley Civilization से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी UPSC के लिए।

सिंधु घाटी की सभ्यता(Indus Valley Civilization) का उद्भव काल भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमी क्षेत्रों में हुआ था| जो अब भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के क्षेत्रों में स्थित है| इस काल में सेंधव सभ्यता का विकास सबसे पहले हुआ तथा इसी सभ्यता का विस्तार हुआ|Indus Valley Civilization को हड़प्पा की सभ्यता भी कहते हैं, क्योंकि 1911 ईस्वी में हड़प्पा की संस्कृति में सिंधु घाटी सभ्यता के कुछ संबंध पाए गए हैं|

Indus Valley Civilizationएक नगरीय सभ्यता थी| क्योंकि खुदाई के पश्चात मिले अवशेषों से इस सभ्यता के परिवहन, व्यापार ,तकनीकी, उत्पादन एवं नियोजन नगर व्यवस्था आदि के तथ्य मिलते हैं| चलिए जानते हैं की सिंधु सभ्यता क्या है?

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पिछले 15 वर्षों के SSC के प्रश्न पत्रों में ‘सिंधु घाटी की सभ्यता’ से पूछे गये प्रश्न

Indus Valley Civilization(सिंधु घाटी सभ्यता) का विस्तार:-

Indus Valley Civilization का भौगोलिक विस्तार कश्मीर से लेकर नर्मदा नदी तक तथा सुतकंगेडोर से लेकर मेरठ तक फैला हुआ था|यह सभ्यता तीन चरणों में दर्शाइ गई है:-

  • 35000 ईसा पूर्व से 2350 ईसा पूर्व:- आरंभिक हड़प्पा सभ्यता
  • 2350 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व:- परिपक्व हड़प्पा सभ्यता
  • 1750 ईसा पूर्व से आगे:- उत्तर हड़प्पा सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता के साक्ष्य:-

स्थान पुरातात्विक साक्ष्य
कोटदीजीकांसे की चूड़ियां, नगर के चारों ओर अति सुंदर विशाल सुरक्षात्मक दीवार के अवशेष मिलते हैं|
रहमानढेरीआयताकार नगर एवं नियोजित ढंग से बने हुए मकान, सड़कें, नालियां और मोहरों के अवशेष मिलते हैं|
मेहरगढ़लाजवर्त मणियो के अवशेष मिलते हैं|
रंदाघुंडईचित्र युक्त बर्तन, कूबड़ वाले बैल के अवशेष मिलते हैं|

Indus Valley Civilization(सिंधु घाटी सभ्यता) का नगर नियोजन:-

  1. सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता उसकी नगर नियोजन है| इस नगर नियोजन में सड़के सीधी एवं नगर आमतौर पर चौकोर होते थे|
  2. इस सभ्यता में बनी सड़कें एवं गलियां निर्धारित योजना के अनुसार ही बनाई जाती थी| सड़कें एक दूसरे को समान कोण पर काटते हुए जाल जैसी फैली हुई थी|
  3. सड़कों के किनारे की नालिया ऊपर से ढकी रहती थी| घरों का गंदा पानी बंद नालियों से होते हुए नगर के बाहर मुख्य नाली में गिरता था|
  4. नालियों का निर्माण ईंट और मोटार के प्रयोग से किया जाता था| कहीं – कहीं नाली बनाने के लिए चूने का भी प्रयोग किया जाता था|
  5. सभी प्रकार के भवनों के निर्माण में पक्की ईंटों का प्रयोग होता था|
  6. इस सभ्यता में बनाई जाने वाली ईट एक निश्चित अनुपात में बनाई जाती थी| जिनमें इनकी लंबाई, चौड़ाई और मोटाई का अनुपात क्रमशः 4:2:1 होता था|
  7. सिंधु घाटी की सभ्यता में सभी नगर दो भागों में विभाजित है| पहला भाग दुर्ग कहलाता था, और दूसरा भाग निचला शहर कहलाता था| दुर्ग में उच्च श्रेणी के लोग निवास करते थे| जबकि निचला नगर में सामान्य लोग रहते थे|
  8. घरों का निर्माण सरल ढंग से किया जाता था| सभी घरों में एक समानता थी| सामान्य रूप से एक घर में चार से पांच कमरे होते थे|
  9. प्रत्येक घर में एक आंगन, रसोईघर तथा स्नानघर होता था| जबकि अधिकांश घरों में कुएं भी पाए जाते थे|
  10. मोहनजोदड़ो में विशाल अन्नभंडार भी था| जो एक सार्वजनिक स्थल के रूप में प्रयोग किया जाता था। इसकी लंबाई 45.71 मीटर और चौड़ाई 15.3 मीटर थी|
  11. हड़प्पा संस्कृति में भी अन्नभंडार के अवशेष मिलते हैं| किंतु वे मोहनजोदड़ो के अन्नभंडार से छोटे होते थे|

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सिंधु घाटी सभ्यता की राजनीतिक व्यवस्था:-

  1. सिंधु घाटी सभ्यता की राजनीतिक व्यवस्था के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती| क्योंकि ऐसा माना जाता है, कि हड़प्पा शासन काल के व्यापारी वर्ग ही हड़प्पा की सभ्यता पर शासन करते थे|
  2. मैके के मतानुसार मोहनजोदड़ो में शासन एक प्रतिनिधि के द्वारा किया जाता था|
  3. व्हीलर के अनुसार सिंधु प्रदेश के लोगों में शासन को मध्यमवर्गीय जनतंत्रात्मक माना जाता है और इसमें धर्म की भूमिका को अधिक महत्व दिया गया है|

सिंधु घाटी सभ्यता की सामाजिक व्यवस्था:-

  1. सिंधु घाटी मे मिले मातृ देवी की पूजा तथा मोहरों पर अंकित चित्र से यह स्पष्ट होता है कि सिंधु सभ्यता एक मातृसत्तात्मक सभ्यता थी|
  2. समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार होती थी|
  3. सिंधु सभ्यता को चार भागों में विभाजित किया गया था|योद्धा, पुरोहित, व्यापारी , और श्रमिक|
  4. इस सभ्यता में श्रमिकों की स्थिति का आकलन शासक के द्वारा दास प्रथा के रूप में किया जाता था|
  5. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग सूती और ऊनी दोनों प्रकार के वस्त्र पहनते थे|
  6. इस सभ्यता की स्त्रियां अपने सौंदर्य पर काफी ध्यान देती थी | खुदाई के दौरान काजल, लिपस्टिक, कंगी आदि के अवशेष इन सभी के साक्ष्य हैं|
  7. इस सभ्यता में स्त्री और पुरुष दोनों आभूषण का प्रयोग करते थे|
  8. अमीर लोग सोने, चांदी, हाथी के दंत, कंगन आदि के आभूषण पहनते थे| जबकि गरीब लोग सीपी, तांबे और पत्थर के बने आभूषणों का प्रयोग करते थे|
  9. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग मृतकों का दाह संस्कार करते थे| इस सभ्यता में मृतकों को जलाने और दफनाने दोनों प्रकार के अवशेष मिलते हैं|

Indus Valley Civilization(सिंधु घाटी सभ्यता) की आर्थिक व्यवस्था:-

  1. इस सभ्यता की आर्थिक व्यवस्था कृषि प्रधान थी| इसके अलावा यहां के लोग पशुपालन और व्यापार भी करते थे|
  2. इस सभ्यता के किसान गेहूं, जौ, चावल, कपास और सब्जियों का उत्पादन करते थे|
  3. कपास का सर्वप्रथम उत्पादन सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों के द्वारा ही किया गया हैं| इसलिए यूनानी इन्हें सीडोन के नाम से जानते थे|
  4. वाणिज्य व्यापार करने के लिए व्यापारी, बैलगाड़ी और नावो का प्रयोग करते थे|
  5. इस सभ्यता का व्यापार मध्य एशियाई देशों में भी फैला हुआ था|
  6. सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख बंदरगाह लोथल, रंगपुर, सुतकंगेडोर और प्रभास पाटन थे|
  7. इस सभ्यता के व्यापारी कीमती पत्थर, धातु , सीपी, आदि का व्यापार करते थे|

सिंधु घाटी सभ्यता की कला:-

  1. इस सभ्यता के लोगों में कला के प्रति विशेष रूचि थे|
  2. हड़प्पा सभ्यता की सर्वोत्तम कलाकृति उनकी मोहरों में मिलती है|
  3. इस काल में बने मृदभांड, चिकने और चमकीले होते हैं| इन मृदभांड पर आमतौर से वृक्ष एवं वृत्त की आकृति बनाई जाती थी|
  4. इस साल की शिल्प कला काफी विकसित थी| इस सभ्यता के लोग टीन और तांबे को मिलाकर कांसा तैयार करते थे|
  5. इस सभ्यता में भारी मात्रा में छोटी-छोटी मूर्तियां बनाई जाती थी| जो खिलौने एवं पूज्य प्रतिमाओं के रूप में प्रयोग की जाती थी|

सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि:-

  1. इस सभ्यता की लिपि चित्रात्मक एवं भावात्मक थी| जिनकी लिखावट दाई ओर से बाई ओर की जाती थी|
  2. सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों को अभी तक पढ़ना लिखना नहीं आया था| इस सभ्यता के लोग बोलचाल के लिए लगभग 46 मूल चिन्ह एवं 250 से 400 तक आकारों का प्रयोग करते थे |
  3. सिंधु सभ्यता की लिपि मूलता भारतीय है| इसका किसी अन्य सभ्यताओं की लिपियों से कोई संबंध नहीं है|

सिन्धु घाटी की सभ्यता Handwritten Class Notes By Raj Holkar

याद रखने योग्य बातें की सिंधु सभ्यता क्या है:-

  • मोहनजोदड़ो का अर्थ मृतकों का टीलों से होता हैं|
  • कालीबंगा का मतलब काले रंग की चूड़ियां से होता हैं|
  • लोथल इस सभ्यता का सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह था|
  • अग्निकुंड- लोथल और कालीबंगा में प्राप्त हुए थे|
  • कालीबंगा के मकान कच्ची ईंटों से बने हुआ करते थे|
  • इस सभ्यता में व्यापार का माध्यम वस्तुओं का आदान प्रदान होता था|
  • स्वास्तिक का चिन्ह हड़प्पा सभ्यता की देन है|
  • इस सभ्यता का परिवर्ती काल रंगपुर और राजदी में उल्लेखित है|
  • हड़प्पा में अन्नभंडार, गढ़ी से बाहर व मोहनजोदड़ो में पाए जाने वाले अन्नभंडार, गढ़ी के अंदर मिलते थे

सिंधु घाटी सभ्यता के पतन का कारण

सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के बारे में विद्वानों का मतभेद है| विभिन्न विद्वानों ने इसके पतन के अलग-अलग कारण दिए हैं|

  • जॉन मार्शल के अनुसार इस सभ्यता के पतन का कारण प्रशासन में लोगों के प्रति विश्वास ना होना बताया जाता है|
  • आरेल स्टाइन के अनुसार इस सभ्यता का पतन जलवायु परिवर्तन के कारण हुआ था|
  • जान मार्शल मैप एवं राव जैसे विद्वानों के अनुसार सिंधु घाटी में बाढ़ आने की वजह से इस सभ्यता का पतन हुआ था|
  • के यू आर केनेडी के अनुसार सिंधु घाटी में प्राकृतिक आपदा आने की वजह से सिंधु घाटी की सभ्यता नष्ट हो गई थी|

दोस्तों आज के लेख में हमने UPSC से जुड़े हुए कुछ महत्वपूर्ण टॉपिक पर बात की आज हमने आपको UPSC के इतिहास भाग से पूछे जाने वाले देश की Indus Valley Civilization और सिंधु सभ्यता क्या है? के बारे में जानकारी दी| आज के लेख में हमने सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी हुई सभी महत्वपूर्ण बातें बताई|यदि आपको यह लेख पसंद आया हो, तो इस लेख को दूसरे लोगों तक जरूर शेयर करें|