अन्तराष्ट्रीय संबंध-राजस्थान लोक सेवा आयोग (RAS/RTS) महत्वपूर्ण पुस्तक हिंदी में

International Relations – Rajasthan Public Service Commission (RAS / RTS) Important book in Hindi-Hello Students जैसा की आप सभी जानते हैं की हम आप सभी के लिए प्रतिदिन Competitve exams से सम्बंधित विभिन्न जानकारियां और नोट्स हिंदी और English दोनों भाषाओँ में शेयर करते ही हैं| दोस्तों आज इस पोस्ट के माध्यम से आप सभी के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण पुस्तक शेयर कर रहे हैं जो “अंतरराष्ट्रीय संबंध-राजस्थान लोक सेवा आयोग (RAS/RTS” की है| दोस्तों आप सभी की जानकारी के लिए हम बता दें की यह पुस्तक पूरी तरह हिंदी भाषा में तैयार किया गया है| जो होने वाली आगामी परीक्षाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है|

दोस्तों हम आप सभी को इस पुस्तक में क्या-क्या पढने को मिलेगा हम नीचे लिस्ट के माध्यम से शेयर कर रहे हैं| आप सभी इस पुस्तक को नीचे दिए गये बटन के  माध्यम से आसानी के साथ डाउनलोड कर सकते हैं| दोस्तों अन्तराष्ट्रीय संबंध के बारे में कुछ जानकारी हमने नीचे आप सभी के साथ शेयर की हैं जिसे आप सभी अवश्य पढ़ें| पूरी जानकारी पढने के लिए पुस्तक को डाउनलोड करें|

अंतरराष्ट्रीय संबंध से तात्पर्य दो या अधिक राष्ट्रों के मध्य संबंधों के रूप से है| जिसमें राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सामरिक संबंध स्थापित होते हैं| दो या दो से अधिक राष्ट्रों के मध्य संबंधों का निर्धारण अनेक पहलुओं के द्वारा निर्धारित होता है, जिस में शामिल है- राष्ट्र की शासन व्यवस्था, भौगोलिक अवस्थिति, संसाधनों की उपलब्धता, सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक विकास क्रम, विचारधारा एवं ऐतिहासिक मूल्य इत्यादि| अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अंतर्राष्ट्रीय संगठन, वैश्विक व्यापार प्रतिरूप एवं ने नेतृत्व क्षमता भी प्रभावित करती है| राष्ट्र की सुरक्षा एवं संपन्नता को सुनिश्चित करने के लिए ना सिर्फ पड़ोसी देशों के साथ बल्कि अन्य राष्ट्रों के साथ भी सकारात्मक एवं सौहार्दपूर्ण संबंध सहायक सिद्ध होते हैं|

चूंकि मध्य युग तक राष्ट्रीय राज्यों का अस्तित्व ही नहीं था, तकनीकी दृष्टि से उस समय से पूर्व अंतरराष्ट्रीय संबंध भी संभव नहीं थे| तथापि, इस बात के स्पष्टीकरण की कोई आवश्यकता नहीं है कि प्राचीन काल में अंतरराष्ट्रीय मामलों को उजागर करने वाले राजनीतिक गतिविधियां प्रत्यक्ष थी| अंतरराष्ट्रीय संबंधों में राष्ट्रीय राज व्यवस्था की अवधारणा के उदय के संकेत 1648 की बेस्टफेलिया की संधि (Westphalia Treaty) से मिलते हैं, जिसने यूरोप में 30 वर्षों (1618-1648) के युद्ध को समाप्त कर दिया| यह संधि राज्य व राज्य-व्यवस्था को कानूनी मान्यता देती थी| वास्तव में इसके द्वारा दो राज्यों स्वीटजरलैंड और नीदरलैंड का निर्माण हुआ इसके बाद यूरोपीय शासकों ने रोमन कैथोलिक चर्च को सत्ता को स्वीकार कर दिया|

कालांतर में राष्ट्र-राज्य की अवधारणा ने ना केवल विभिन्न अर्थ एवं ग्रुप ग्रहण किए हैं बल्कि इसकी सत्ता के नवीन उपलब्धियों का भी सामना किया है| हाल के वर्षों में व्यापार, उत्पादन और वित्त का वैश्वीकरण; संचार एवं परिवहन के क्षेत्र में क्रांति, तकनीकी एवं शत्रों के विस्तार तथा पर्यावरण एवं सतत सामरिक संगठन ने ऐसी समस्याएं खड़ी की है, जिनका समाधान राष्ट्र-राज्यों की संरचना के अंतर्गत नहीं किया जा सकता| यह अधिराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक संस्थाओं की खोज एवं विस्तार को अनिवार्य बनाता है जो कि राष्ट्रीय संप्रभुता के परंपरागत मूल्य को दुर्बल बना सकता है| त्वरित वैश्वीकरण (Globalisation) के सांस्कृतिक प्रभाव अपने साथ उन विघटन कारी तत्वों को भी ला रहे हैं, जो समाज को अधोपतन की ओर प्रवृत्त करते हैं और जो पुरानी सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इकाइयों को विखंडित कर सकते हैं| अधोगमन की यह प्रवृत्ति पश्चिम के आर्थिक रूप से उन्नतिशील राष्ट्र- राज्यों में अधिक दिखाई देती है तथा इसका उद्देश्य राष्ट्र-राज्यों की एक संस्था के रूप में उसकी सत्ता के साथ-साथ उनके महत्व एवं औचित्य को भी कम करना प्रतीत होता है|

विषय सूची: अन्तराष्ट्रीय संबंध-राजस्थान लोक सेवा आयोग (RAS/RTS)

  • अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं कुछ महत्वपूर्ण संकल्पनायें
  • शीत योद्धओत्तर विश्व व्यवस्था
  • संयुक्त राष्ट्र एवं उसकी अन्य महत्वपूर्ण संस्थाएं
  • क्षेत्रीय संगठन
  • अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद
  • भारत की विदेश नीति
  • भारत का अन्य देशों के साथ संबंध
  • एशिया में भू-राजनीतिक एवं राजनीतिक विकास

About PDF: अन्तराष्ट्रीय संबंध-राजस्थान लोक सेवा आयोग (RAS/RTS)

  • Book Name: अन्तराष्ट्रीय संबंध-राजस्थान लोक सेवा आयोग (RAS/RTS)
  • Size: 45 MB
  • Pages: 121
  • Quality: Excellent
  • Format: PDF
  • Language: Hindi
  • Sharing Credits: _

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