GK Tricks-भारत की प्रमुख नदियाँ और उनको याद करने का आसान तरीका

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भारत की प्रमुख नदियाँ और उनको याद करने का आसान तरीका -Hello Readers आज हम आप सभी को भारत के प्रमुख नदियों के नाम बताने जा रहे हैं| हम आज आप को भारत के प्रमुख नदियों को याद करने का एक ऐसा तरीका बताएँगे जो आप अपने Life में कभी नहीं भूल पाएंगे| यह तरीका बहुत ही Efective है हम आप सभी को भारत के प्रमुख नदियों के नाम नीचे उनके बारे में संक्षेप में बता रहे हैं| आप इस Post को अंतिम तक जरुर पढ़िए तभी आप को भारत के प्रमुख नदियों के नाम को याद करने के Trick के बारे में सही से ज्ञात होगा|

भारत की प्रमुख नदियाँ और उनको याद करने का आसान तरीका

सिंधु नदी

सिंधु नदी को इंडस नदी भी कहा जाता है| इस नदी का उद्गम तिब्बत स्थित मानसरोवर झील से हुआ है| सिंधु नदी तिब्बत, भारत तथा पाकिस्तान में बहते हुए अरब सागर में मिल जाती है| सिंधु नदी की कुल लंबाई लगभग 2880 किलोमीटर है तथा या भारत में 992 किलोमीटर लंबी है| सिंधु नदी की प्रमुख सहायक नदियां झेलम, चेनाव, रावी, व्यास एवं सतलज है|

झेलम नदी

झेलम नदी का उद्गम कश्मीर घाटी की शेषनाग झील के निकट बेरनाग नाम का स्थान से हुआ है| वूलर झील में मिलने के बाद यह पाकिस्तान में प्रवेश करती है तथा चेनाव नदी में मिल जाती है| झेलम नदी की कुल लंबाई 724 किलोमीटर है एवं भारत में इसकी लंबाई 400 किलोमीटर है|

ब्यास नदी

इस नदी का उद्गम हिमालय के रोहतांग दर्रे के समीप व्यास कुंड से हुआ है | इसकी कुल लंबाई 470 किलोमीटर तय करते हुए पंजाब में सतलज नदी में मिल जाती है |

चेनाव नदी

चिनाव नदी हिमाचल प्रदेश के लाहौल के बारालाचा दर्रे से निकलती है| यह पीरपंजाल के समांतर बहते हुए किश्तवार के निकट पीरपंजाल में गहरा गार्ज बनाती है| भारत में चिनाब नदी की लंबाई 1180 किलोमीटर है| या पाकिस्तान में जाकर सतलज नदी में मिल जाती|

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रावी नदी

रावी नदी हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे से निकलती है एवं पाकिस्तान के मुल्तान के समीप चिनाव नदी में मिल जाती है| इस नदी की लंबाई 720 किलोमीटर है|

सतलज नदी

सतलज नदी का उद्गम तिब्बत स्थित मानसरोवर झील के निकट हर राक्षसताल से हुआ है| यह नदी अपने उद्गम स्थल से 1500 किलोमीटर दूरी तक करके पाकिस्तान में चेनव नदी में मिल जाती है| भारत में सतलज नदी की लंबाई 1050 किलोमीटर है| प्रसिद्ध भाखड़ा- नागल बांध सतलज नदी पर ही बना है|

गंगा नदी

गंगा नदी का उद्गम उत्तराखंड के गोमुख हिमनद के निकट गंगोत्री ग्लेशियर से हुआ है| वास्तव में अलकनंदा तथा भागीरथी नदी के देवप्रयाग मिलने पर यह गंगा नदी कहलाती है| इलाहाबाद के निकट गंगा से यमुना मिलती है जिसे संगम या प्रयाग कहा जाता है| गंगा नदी दक्षिण पूर्व की ओर बढते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है जहां इसे पद्मा कहा जाता है| बांग्लादेश में समुद्र में मिलने से पहले ब्रह्मपुत्र नदी से मिलती है तो इसका नाम मेघना हो जाता है| गंगा नदी की कुल लंबाई 2525 किलो मीटर है तथा भारत में इसकी लंबाई 2510 किलोमीटर है| गंगा नदी पश्चिम बंगाल में विश्व प्रसिद्ध सुंदरवन का डेल्टा का निर्माण करती है| गंगा नदी की प्रमुख सहायक नदियां यमुना, सोना, रामगंगा, घाघरा, कोसी, गंडक, इत्यादि है|

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यमुना नदी 

यमुना नदी गंगा नदी की प्रमुख सहायक नदी है| इस नदी का उद्गम उत्तराखंड के यमुनोत्री नामक ग्लेशियर से हुआ है जो बंदरपूंछ पहाड़ी पर स्थित है| यमुना नदी के किनारे दिल्ली, मथुरा तथा आगरा जैसे बड़े शहर बसे हुए हैं| यह लगभग 1375 किलोमीटर का सफर तय करके इलाहाबाद के निकट प्रयाग में गंगा नदी में मिल जाती है| गंगा नदी की प्रमुख सहायक नदियों में टोंस, चंबल, बेतवा, केन, तथा काली सिंह आदि शामिल है| यमुना नदी को भारत की सबसे अधिक प्रदूषित नदी माना जाता है|

चंबल नदी 

चंबल नदी मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में स्थित महू के निकट जानापाओ पहाड़ी से निकलती है| यह नदी मध्य प्रदेश राजस्थान होते हुए उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में यमुना नदी में मिल जाती है| चंबल नदी की लंबाई लगभग 950 किलोमीटर है| यह नदी बीहड़ों (गड्ढे) का निर्माण करती है|

घाघरा नदी 

इस नदी का उद्गम मपचाचुंग ग्लेशियर से हुआ है जो तिब्बत के पठार में स्थित है| यह नेपाल के मध्य से बहती है| हिमालय तथा शिवालिक श्रेणियों को पार करते समय या राशिपानी नामक स्थान पर गहरी संकीर्ण घाटी का निर्माण करती है| घाघरा नदी बिहार में छपरा के पास गंगा नदी में मिल जाती है| इस नदी की लंबाई लगभग 1200 मीटर है|

गोमती नदी 

गोमती नदी का उद्गम उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से हुआ है| उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ इसी नदी के किनारे बसा हुआ है| यह गाजीपुर के निकट गंगा नदी में मिल जाती है|

गण्डक नदी 

इस नदी का उद्गम नेपाल, तिब्बत की सीमावर्ती पर्वत श्रंखलाओं से हुआ है| नेपाल में इस नदी को शालिग्रमी तथा नारायणी नाम से जाना जाता है| उत्तर प्रदेश तथा बिहार की सीमा में बहते हुए यह नदी पटना के पास गंगा नदी में मिल जाती है| गंडक नदी की लंबाई लगभग 425 किलोमीटर है|

कोसी नदी 

कोसी नदी का उद्गम प्रारंभिक रूप में 7 धाराओं से हुआ जो नेपाल, हिमालय तथा कंचनजंघा पर्वत से निकलती है| इन धाराओं में सबसे बड़ी धारा का नाम अरुण है जो माउंट एवरेस्ट के पास से निकलती है| बिहार के मैदानी भागों में बहते हुए यह नदी भागलपुर जिले में गंगा नदी में मिल जाती है| कोसी नदी की लंबाई लगभग 750 किलोमीटर है| कोसी नदी अपने मार्ग परिवर्तन एवं भयंकर बाढ़ के लिए कुख्यात है| यह प्रतिवर्ष बिहार में जन धन की अपार क्षति पहुंचाती है इसलिए इसे बिहार का शोक कहा जाता है|

दामोदर नदी

इस नदी का उद्गम छोटा नागपुर के पठार में स्थित प्लामू पहाड़ी से हुआ है| यह झारखंड से बहती हुई पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है तथा हुगली नदी में मिल जाती है| दामोदर नदी द्वारा पश्चिम बंगाल में बाढ़ से भारी तबाही लाती है, इसलिए इसे पश्चिम बंगाल का शोक कहा जाता है| इस नदी पर दामोदर नदी घाटी परियोजना संचालित है जो अमेरिका की टेंसी नदी घाटी परियोजना पर आधारित है|

बेतवा नदी

बेतवा नदी का उद्गम मध्यप्रदेश से होता है| यह रायसेन जिले में स्थित कुमार गांव के निकट विंध्याचल पर्वत से निकलती है| इस नदी की लंबाई 475 किलोमीटर है| यहउत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में यमुना नदी मिल जाती है| इस नदी पर माताटीला एवं राजघाट बांध निर्मित है|

सोन नदी 

सोन नदी का उद्गम मध्य प्रदेश में स्थित अमरकंटक की पहाड़ियों से हुआ है| यह मध्य प्रदेश के रीवा एवं सीधी जिले से बहती हुई उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है तथा पटना के समीप गंगा नदी में मिल जाती है| सोन नदी की लंबाई लगभग 775 किलोमीटर है| इस नदी पर बाणसागर परियोजना एवं रिहंद परियोजना संचालित है|

ब्रम्हपुत्र नदी 

ब्रम्हपुत्र नदी का उद्गम तिब्बत स्थित मानसरोवर झील से हुआ है| इस नदी का उद्गम स्थल समुद्र तल से 5150 ऊंचाई पर स्थित है| ब्रम्हपुत्र नदी तिब्बत में सांग्पो नाम से जाना जाता है तथा भारत में अरुणाचल प्रदेश से प्रवेश करने के बाद यह दिहांग कहलाती है| असम में इस ब्रम्हपुत्र नाम से जाना जाता है तथा बांग्लादेश में इसे जमुना कहा जाता है| गंगा एवं ब्रह्मपुत्र के संगम के बाद दोनों की सम्मिलित धारा को मेघना कहा जाता है| ब्रम्हपुत्र नदी की कुल लंबाई 2900 किलो मीटर है तथा भारत में यह 916 किलोमीटर लंबी है| इस नदी पर असम राज्य में विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजेली द्वीप स्थित है|

नर्मदा नदी 

यह नदी मध्यप्रदेश के विध्यांचल पर्वत में स्थित अमरकंटक की पहाड़ियों से निकलती है| यह अपने उद्गम स्थान से पश्चिम की ओर 1312 कीमी की दूरी तय करती हुई गुजरात में भ्दौच के निकट खेबात की खाड़ी में गिरती है| नर्मदा नदी पर डेल्टा का निर्माण नही करती यह एश्चुअरी का निर्माण करती है| इस नदी पर इंदिरा सागर परियोजना, ओंकारेश्वर एवं सरदार सरोवर परियोजना निर्मित है|

ताप्ती नदी 

इस नदी का उद्गम मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई नगर के पास हुवा है| ताप्ती नदी पश्चिम की ओर नर्मदा नदी के सामानांतर बहती हुई गुजरात में सूरत के निकट खम्बात की कड़ी में गिरती है| इस नदी की लम्बाई 724 कीमी है|

महा नदी

महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले में स्थित सिंघवा पहाड़ी से होता है| या नदी छत्तीसगढ़ एवम उड़ीसा राज्य में 857 किलोमीटर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है| इस नदी पर उड़ीसा राज्य में प्रसिद्ध हीराकुंड बांध बना है|

गोदावरी नदी 

इस नदी का उद्गम महाराष्ट्र के नासिक जिले से होता है| गोदावरी नदी दक्षिण भारत की सबसे लंबी नदी है इसकी लंबाई 1465 किलोमीटर है| अपने विशाल आकार के कारण इस नदी को दक्षिण की गंगा एवं वृद्ध गंगा के नाम से जाना जाता है| यह महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना के पठार को पार करती हुई बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है|

कृष्णा नदी 

कृष्णा नदी महाराष्ट्र के महाबलेश्वर निकट एक झरने से निकलती है| यह महाराष्ट्र कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश में बहते हुए विजयवाड़ा के निकट विभिन्न शाखाओं में बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है| इस नदी की लंबाई 1400 किलोमीटर है| कृष्णा नदी पर नागार्जुन सागर परियोजना तथा श्री शैलम परियोजना निर्मित है|

कावेरी नदी 

कावेरी नदी का उद्गम कर्नाटक राज्य के कुर्ग जिले में स्थित ब्रह्मागिरी की पहाड़ियों से हुआ है| कावेरी नदी में प्रसिद्ध शिवसमुद्रम जलप्रपात स्थित है| यह नदी 800 किलोमीटर दूरी तय करते हुए बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है|

क्षिप्रा नदी 

क्षिप्रा नदी मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में स्थित काकरी बरडी पहाड़ी से निकलती है| इस नदी के किनारे उज्जैन का विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर स्थित है यहां प्रत्येक 12 वर्षों में कुंभ का मेला लगता है|

माही नदी 

इस नदी का उद्गम अरावली पर्वत श्रंखला से होता है तथा यह गुजरात में खम्बात की खाड़ी में गिरती है| यह नदी कर्क रेखा को दो बार काटती है|

साबरमती नदी 

साबरमती राजस्थान के उदयपुर में अरावली पर्वत श्रंखला से निकलती है तथा खंभात की खाड़ी में मिल जाती है| इस नदी के किनारे अहमदाबाद से गांधीनगर बसे हुए हैं|

भारत की प्रमुख नदियाँ और उनको याद करने का आसान तरीका

तो दोस्तों अब हम आते हैं जिसका आप लोगों को बेसब्री से इंतजार है कि इस सब को याद करने की Trick 26 नदियों को हम याद कैसे करें? तो दोस्तों चलिए आब हम बताते हैं उस Trick को | सबसे पहले हम उन सारी नदियों के नाम लिखते हैं फिर उसके नीचे आप सभी को इसका पूरा Trick बताते हैं जिस से आप सभी को और भी ज्यादा अच्छे से समझ में आएगा |

1 दामोदर नदी 2 माही नदी
3 क्षिप्रा नदी 4 सोन नदी
5 कावेरी नदी 6 महानदी
7 ब्रम्हपुत्र नदी 8 गंडक नदी
9 बेतवा नदी 10 ताप्ती नदी
11 गोमती नदी 12 कोसी नदी
13 घाघरा नदी 14 नर्मदा नदी
15 रावी नदी 16 गोदावरी नदी
17 ब्यास नदी 18 झेलम नदी
19 सिंधु नदी 20 गंगा नदी
21 यमुना नदी 22 कृष्णा नदी
23 साबरमती नदी 24 सतलज नदी
25 चेनाव नदी 26 चंबल नदी

अब आपको याद करने की विधि Trick हम आपको बता रहे हैं| Trick हम नीचे लिख कर बता रहे हैं| आप नीचे दिए गये दोहे को अच्छी तरह से यद् कर लें और इसको कैसे प्रयोग में लाना है यह तो आप समझ ही गये होंगे अगर नहीं समझे हैं तो आप को नीचे हम बता रहे हैं की कैसे इस दोहे के माध्यम से भारत की प्रमुख नदियों के नामों को याद करने हैं| सबसे पहले आप को लाल रंग के शब्दों को प्रयोग में नहीं लाना है|

दक्ष का पुत्र बेत गोमती की मां सोनम गुप्ता को घाघरा पहना र गोद में उठा कर व्या करके झेलम से ले गया कृष्णा सुदामाब देख रहे थे और बेताल को चेचक हो गया

ऊपर दिए गये शब्दों को आप एक दोहे की तरह रट लें | हम आप को नीचे इसके एक-एक शब्द का सही पुर्बक अर्थ बता रहे हैं की कोन सा शब्द कहाँ पर प्रयोग होगा|

भारत की प्रमुख नदियाँ और उनको याद करने का आसान तरीका

दामोदर नदी मां माही नदी
क्ष क्षिप्रा नदी सोन सोन नदी
का कावेरी नदी महानदी
पुत्र ब्रम्हपुत्र नदी गंडक नदी
वेत बेतवा नदी ता ताप्ती नदी
गोमती गोमती नदी को कोसी नदी
घाघरा घाघरा नदी नर्मदा नदी
रावी नदी गोद गोदावरी नदी
व्या ब्यास नदी झेलम झेलम नदी
सिंधु नदी गंगा नदी
या यमुना नदी कृष्णा कृष्णा नदी
साबरमती नदी सतलज नदी
चे चेनाव नदी चंबल नदी
तो दोस्तों यह रही आप की 26 नदियों को यद् करने का सबसे आसान Trick जिसे आप कभी नहीं भूल सकते हैं| Readers अगर आप को आज का हमारा यह Post अच्छा लगा हो तो आप हमें Comment कर के जरुर बताएं| यह Post अपने दोस्तों के साथ share जरुर करें|

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