Reason of First World War, प्रथम विश्व युध्य के क्या कारण थे? संक्षेप में जाने ।

Reason of First World War:- दोस्तों, हम सभी ने इतिहास में यह जरूर पढ़ा होगा, कि विश्व में कई बार युद्ध चुके हैं| किंतु संपूर्ण विश्व में दो ऐसे विश्वयुद्ध हुए हैं| जिनमें पूरे विश्व को बहुत क्षति हुई है| आज के लेख में हम आपको उन्हें विश्व में से एक विश्व युद्ध के बारे में जानकारी देंगे| आज के लेख में हम आपको प्रथम विश्व युद्ध के कारण के बारे में संक्षिप्त जानकारी देंगे और आपको यह बताएंगे कि किन कारणों (Reason of First World War) के वजह से प्रथम विश्व युद्ध हुआ|

Reason of First World War, प्रथम विश्व युध्य के क्या कारण थे? संक्षेप में जाने ।

प्रथम विश्वयुद्ध (Reason of First World War) विश्व स्तर पर लड़ा गया और यह प्रथम विध्वंसकारी युद्ध साबित हुआ था| इस युद्ध में विश्व के लगभग सभी विकसित देशों ने भाग लिया था| जिन्हें दो भागों में बांट दिया गया था| जो निम्न है-

1- मित्र राष्ट्र :- संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, रूस, इंग्लैंड, रोमानिया, इटली तथा उनके अन्य सहयोगी देश|

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2- केंद्रीय शक्ति:- जर्मनी, तुर्की, ऑस्ट्रिया, हंगरी और उनके सहयोगी देश|

यह युध्य मित्र राष्ट्र और केंद्रीय शक्ति के मध्य लड़ा गया| जिसमें मित्र राष्ट्र ने केंद्रीय शक्तियों को पराजित कर दिया|

प्रथम विश्व युद्ध के कारण(Reason of First World War)

प्रथम विश्वयुद्ध (First World War) के अनेक कारण(Reason of First World War) थे| जिनमें से निम्न कारण के बारे में आपको जानकारी देंगे-

  • यूरोपीय शक्तियों के संतुलन का बिगड़ना
  • गुप्त संधियों एवं गुटो का निर्माण होना
  • फ्रांस और जर्मनी के मध्य शत्रुता बढ़ना
  • समाज में साम्राज्य बढाने की प्रतिस्पर्धा
  • सैन्य क्षमता बहाने की प्रतिस्पर्धा
  • देशों के मध्य उग्र विवाद का होना
  • अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ना होना
  • जनता का मत एवं समाचार पत्र से प्रभावित होना
  • तत्कालीन कारण

प्रथम विश्व युद्ध (First World War) होने के लिए अनेक कारण माने जाते हैं| जिनमें से निम्नलिखित कारण महत्वपूर्ण है-

यूरोपीय शक्तियों के संतुलन का बिगड़ना

जर्मनी ने 1871 में अपने आप को अन्य देशों से अलग कर लिया| जिसके कारण यूरोपीय राजनीति में जर्मनी ने हिस्सा नहीं लिया| किंतु बिस्मार्क के नेतृत्व में जर्मनी एक शक्तिशाली राष्ट्र बन कर उभरा| जिसके कारण यूरोपीय शक्तियों का संतुलन बिगड़ गया| इससे प्रभावित होकर इंग्लैंड और फ्रांस में जर्मनी के प्रति प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ने लगी| जिससे यूरोपीय देशों में शक्तिशाली राष्ट्र बनने की प्रतिस्पर्धा ने जन्म लिया|

गुप्त संध्या एवं गुटों का निर्माण होना

यूरोपीय देशों से जर्मनी का अलग हो जाने के पश्चात, जर्मनी के चांसलर बिस्मार्क ने जर्मनी को यूरोपीय राजनीति में अत्यंत प्रभावशाली बनाने के लिए और फ्रांस को यूरोप की राजनीति से बाहर करने के लिए अनेक प्रकार की गुप्त संधि बनाई| जर्मनी ने ऑस्ट्रिया और हंगरी के साथ मिलकर द्वैत संधि (Dual Alliance) तथा रूस के साथ मैत्री संधि स्थापित की| जर्मनी ने इंग्लैंड के साथ मैत्रीवत बनाई| जर्मनी ने 1882 में इटली और ऑस्ट्रिया के साथ अपने मित्र का संबंध स्थापित किए| जिसके फलस्वरूप यूरोप में एक नया गुट बन गया| जिसे त्रिगुट संधि के नाम से जाना जाता है| इस संधि में जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हंगरी और इटली शामिल थे| जबकि इंग्लैंड और फ्रांस को इस गुट से अलग कर दिया गया था|

फ्रांस और जर्मनी के मध्य शत्रुता बढ़ना

फ्रांस और जर्मनी के बीच पुरानी शत्रुता थी| यूरोपीय देशों से जर्मनी के अलग होने के दौरान बिस्मार्क ने फ्रांस के धनी प्रदेशों पर अपना अधिकार जमा लिया था| और मोरक्को में भी फ्रांसीसी संपत्ति को क्षति पहुंचाई थी| जिसके कारण फ्रांस की जनता जर्मनी के विरुद्ध हो गई| फ्रांस हमेशा जर्मनी को नीचा दिखाने की कोशिश में लगा रहता था| जबकि दूसरी ओर जर्मनी भी फ्रांस को कमजोर बनाने के लिए कोशिश करती रहती थी| जिस वजह से जर्मनी और फ्रांस के मध्य शत्रुता बढ़ गई और त्री-गुट समझौते किए गए| इसके बदले में फ्रांस ने जर्मनी के विरुद्ध भी अपने मित्र राष्ट्रों का एक गुट तैयार कर लिया| प्रथम विश्व युद्ध के समय जर्मनी और फ्रांस के मध्य शत्रुता चरम सीमा पर थी| जिसके कारण प्रथम विश्व युद्ध होना लगभग तय माना जाने लगा|

समाज में साम्राज्य बढाने की प्रतिस्पर्धा

  • विकसित देशों का अपने देश का विस्तार करने के लिए आपसी प्रतिद्वंदी एवं हितो के मनमुटाव के कारण विश्व युद्ध (First World War) छिड़ गया|
  • जैसे- जैसे देशों में औद्योगिक क्रांति हुई और कारखानों को चलाने के लिए कच्चे माल के लिए तथा कारखानों से बने वस्तुओं को बाजार में बेचने की होड़ मच गई| जिसके कारण इंग्लैंड, रूस और फ्रांस ने एशिया और अफ्रीका देशों में अपने उपनिवेश बना कर उन देशों पर अधिकार कर लिया|
  • इटली और जर्मनी भी इस उपनिवेश की दौड़ में शामिल हो गए| जिसके कारण अलग-अलग देशों में इनके विस्तार की संभावना बहुत कम हो गई| जिसके फलस्वरूप सभी देशों ने उपनिवेशवादी विस्तार की नीति अपनाई| इस नीति के अनुसार समृद्ध देश बलपूर्वक छोटे देशों के उपनिवेशक के ऊपर अधिकार जमा लेते थे|
  • प्रथम विश्व युद्ध (First World War) शुरू होने से पहले जर्मनी आर्थिक और औद्योगिक रूप से मजबूत हो चुके थे, और जर्मनी देश का साम्राज्य तेजी से विस्तार कर रहा था| जर्मनी देश की थल सेना पहले से ही मजबूत थी, लेकिन आर्थिक और औद्योगिक रूप से मजबूत होने के बाद समुद्री जहाजों के साथ और मजबूत हो गए| जर्मनी, इंग्लैंड के समुद्र पर अपना स्वामित्व जमाने के लिए इंग्लैंड को चुनौती देने का प्रयास करने लगा|
  • अपना साम्राज बढ़ाने के लिए तुर्की साम्राज्य की अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से जर्मनी ने वर्लिंग बगदाद रेलमार्ग योजना बनाई |जिसके कारण इंग्लैंड, फ्रांस और रूस ने मिलकर इस योजना का विरोध किया| जिससे जर्मनी के साथ शत्रुता और बढ़ गई|

सैनिक क्षमता बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा

जर्मनी देश अपनी सुरक्षा और विस्तारवादी नीति को आगे बढ़ाने के लिए अस्त्र एवं शस्त्र का निर्माण करने लगा, तथा अन्य देशों से अस्त्र शस्त्रों की खरीददारी भी करने लगा| जर्मनी के साथ साथ अन्य देशों के उपनिवेशक की सुरक्षा के लिए सैनिकों को अधिक मजबूत बनाया जाने लगा| जिसके कारण देश की आय का बहुत बड़ा हिस्सा अस्त्र-शस्त्र के निर्माण एवं सैनिकों के संगठन पर खर्च किया जाने लगा| जिससे देश में सैनिकों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हो गई| जिसके कारण सैनिक अधिकारियों का वर्चस्व बढ़ता गया| जिसका परिणाम यह हुआ कि संपूर्ण यूरोप देश बारूद के ढेर पर बैठ गया और यह विस्फोट सन 1914 में विश्व युद्ध (First World War) के रूप में हुआ|

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देशों के मध्य उग्र विवाद का होना

  • देशों के मध्य उग्रता प्रथम विश्वयुद्ध (First World War) का एक मौलिक कारण माना जाता है|
  • यूरोप में स्थित सभी देश में इस उग्रवाद का समान रूप से विकास हुआ| जो जाति, धर्म, ऐतिहासिक परंपराएं एवं भाषा के लिए पूरे देश में आग की तरह फैल दी गई| जिसके कारण जन के मतों में अलग-अलग विचार धाराएं ने जन्म लिया|
  • राष्ट्रवाद के कारण जर्मनी और इटली एक दूसरे से अलग हो गया| जिससे बाल्कन प्रदेश, जो तुर्की साम्राज्य के अधीन था वह अधिक बलवान हो गया और तुर्की साम्राज्य कमजोर पड़ गया| तुर्की साम्राज्य और आष्ट्रीया के अनेक क्षेत्रों में स्लाव प्रजाति के लोग निवास करते थे| जिन्होंने स्लाव राष्ट्र बनाने के लिए मांग करने लगा|
  • इसी उग्रवाद भावना के कारण संपूर्ण जर्मनी में आंदोलन चलने लगा| जिसके कारण यूरोपीय देशों में शत्रुता की भावना और बढ़ने लगी|

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ना होना

प्रथम विश्व युद्ध (First World War) से पहले विश्व में कोई भी ऐसी संस्था नहीं थी| जो साम्राज्यवाद, उग्र राष्ट्रवाद और सैन्यवाद पर नियंत्रण लगा सके और विभिन्न देशों के मध्य सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित कर सके| विश्व के प्रत्येक देश स्वतंत्रता पूर्वक अपनी मनमानी कर रहे थे| जिसके कारण यूरोपीय राजनीति में भ्रम विचार धारा प्रवाहित हो गई| जो प्रथम विश्व युद्ध (First World War) के लिए कारण मानी जाती है|

जनता का मत एवं समाचार पत्र से प्रभावित होना

प्रथम विश्वयुद्ध (First World War) के लिए उस समय की जनता भी पूर्ण रूप से उत्तरदाई है| क्योंकि प्रथम विश्व युद्ध के समय प्रत्येक देश के राजनीतिक, दार्शनिक और लेखक अपने लेखों के माध्यम से युद्ध के बारे में बातें करते थे| इस युद्ध में धनवान वर्ग के लोग भी समर्थक बन गए और अधिक से अधिक लोगों को मत लेकर समाचार पत्रों में प्रचारित करते रहे| इसके अतिरिक्त प्रत्येक राष्ट्र के समाचार पत्र एक दूसरे के प्रति विरोध, झूठा और भड़काऊ लेख प्रकाशित करते रहे |इन्हीं कारणों के वजह से देश की जनता के मध्य शत्रुता उत्पन्न हो गई| जो प्रथम विश्व युद्ध को आरंभ करने के लिए पर्याप्त थी|

तत्कालीन कारण

प्रथम विश्व युद्ध (First World War) के होने के तुरंत पहले ही ऑस्ट्रिया के युवराज की हत्या एक आतंकवादी संगठन के द्वारा कर दी गई थी| इस हत्या में ऑस्ट्रिया के युवराज और उनकी पत्नी की हत्या हो गई |जिसके कारण सारा यूरोप देश चकित रह गया| ऑस्ट्रिया ने इस घटना के लिए साल्विया को जिम्मेदार ठहराया और साल्विया को धमकी दी, कि वह जल्द से जल्द इस आतंकवादी संगठन को खत्म कर दे| किंतु साल्विया ने ऑस्ट्रिया की बातें नहीं मानी| जिसका परिणाम यह हुआ कि 28 जुलाई 1914 में ऑस्ट्रिया ने साल्विया पर आक्रमण कर दिया| इस प्रकार प्रथम विश्व युद्ध आरंभ हुआ|

दोस्तों आज का आर्टिकल प्रथम विश्व युद्ध (Reason of First World War) के कारण पर आधारित था| आशा करता हूं कि आपको या जानकारी अच्छी लगी होगी |आप अपनी राय हमारे कमेंट बॉक्स सेक्शन में जरूर बताएं तथा अधिक से अधिक लोगों तक इस आर्टिकल को शेयर करें|