RRB NTPC Science Notes (Physics Chemistry and bio) in Hindi

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RRB NTPC Science Notes:- दोस्तो, रेलवे परीक्षा की तैयारी उम्मीदवारों लिए आज के लेख मेहम आपको कुछ ऐसे महत्वपूर्ण नोट्स साझा कर रहेे हैं। जो आरआरबी एनटीपीसी परीक्षा केे लिए बेहद आवश्यक है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, और जीव विज्ञान के नोट्स की जानकारी साझाा कर रहे। संपूर्ण विज्ञान के नोट्स के लिए लेख के अंत में दिए गए लिंक पर क्लिक करके नोट्स को डाउनलोड किया जा सकता है। आपका ज्यादा समय न लेते हुए हम यह लेख शुरू करते हैं।

RRB NTPC Science Notes (Physics Chemistry and bio) in Hindi

भौतिक विज्ञान के नोट्स (RRB NTPC Science Notes)

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आरआरबी एनटीपीसी परीक्षा के लिए भौतिक विज्ञान की तैयारी हेतु यह नोट्स बेहद उपयोगी है।

यांत्रिकी

  • प्रत्येक राशि की माप के लिए उसी राशि का कोई मानक मान लिया जाता है। इस मानक को मात्रक कहते हैं।
  • मानक दो प्रकार के होते हैं। (मूल मात्रक, व्युत्पन्न मात्रक)
  • मूल मात्रक ऐसे मात्रक हैं जिनको आपस में बदला अथवा संबंधित नहीं किया जा सकता।
  • ऐसे मात्रक जो मूल मात्रकों की सहायता से व्यक्त किए जाते हैं। व्युत्पन्न मात्रक कहलाते हैं।
  • मीटर, किलोग्राम, सेकंड, केल्विन, एंपियर, कैंडेला और मोल मूल मात्रक है।
  • समय के साथ-साथ इस स्थिति में परिवर्तन को वस्तु की गति कहते हैं।
  • गति तीन प्रकार की होती है। (घूर्णन गति, स्थानांतरित गति, कंपन्न गति)
  • जिन भौतिक राशियों में केवल परिमाण होता है तथा दिशा नहीं होती। उन्हें अदिश राशि कहते हैं। जैसे:- समय, चाल, द्रव्यमान, कार्य, ऊर्जा आदि।
  • जिन भौतिक राशियों में परिणाम तथा दिशा दोनों होती है। उन्हें सदिश राशि कहते हैं। जैसे:- वेग, विस्थापन, बल, त्वरण आदि।
  • किसी वस्तु पर किया गया कार्य, उस वस्तु पर लगाए गए बस तथा विस्थापन की दिशा के गुणनफल के बराबर होता है।
  • कार्य का मात्रक न्यूटन/मीटर2 होता है।
  • किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। ऊर्जा का मात्रक जूल होता है।
  • जब किसी पिंड पर लगा बाहरी बल उसे किसी और के पारित घुमाने का प्रयास करता है। तो बल्कि इस प्रवृत्ति को बल आघूर्ण कहते हैं।
  • किसी वृत्ताकार मार्ग पर गति करती हुई किसी वस्तु पर जो बल केंद्र की ओर कार्य करता है उसे अभिकेंद्रीय बल कहते हैं।
  • वृत्ताकार मार्ग पर गति करती हुई वस्तु पर जो बल अभिकेंद्रीय बल के विपरीत दिशा में बाहर की ओर लगता है उसे अपकेंद्रीय बल कहते हैं।
  • गुरुत्व वह आकर्षण बल होता है, जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपनी केंद्र की ओर खींचती है।
  • मुक्त रूप से पृथ्वी की ओर गिरती हुई किसी वस्तु के वेग में प्रति सेकंड होने वाली वृद्धि गुरुत्वीय त्वरण कहलाती है।
  • वह न्यूनतम वेग, जिससे किसी पिंड को ऊपर की ओर से एक आ जाए और वह पृथ्वी के गुरुत्व क्षेत्र को पार कर जाए। तथा वापस पृथ्वी पर लौट कर ना आए पलायन वेग कहलाता है।

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पृष्ठ तनाव (RRB NTPC Science Notes)

  • द्रवो अपने पार्शीय क्षेत्रफल को न्यूनतम करने की प्रवृत्ति को पृष्ठ तनाव कहते हैं।
  • एक ही पदार्थ के अणुओं के बीच कार्य करने वाले आकर्षण बल को ससंजक बल कहते हैं।
  • भिन्न-भिन्न पदार्थों के अणु के बीच कार्य करने वाले बल को आसंजक बल कहते हैं।
  • केस नली में द्रव के ऊपर चढ़ने उतरने की प्रक्रिया को केशिकात्व कहते हैं।
  • किसी द्रव का वह गुण जिसके कारण वह अपनी विभिन्न परतों में होने वाली आपेक्षित गति का विरोध करता है। वह द्रव का श्यानता कहलाता है।
  • बरनौली का प्रमेय :- जब कोई जाओ यार एक स्थान से दूसरे स्थान पर धारा रेखीय प्रवाह में बहता है। उसके मार्ग में विभिन्न बिंदुओं पर उसके एकांक आयतन की ऊर्जा गति एवं स्थितिज ऊर्जा का योग निहित होता है।
  • किसी वस्तु को जब द्रव में डुबाया जाता है तब उस वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है। इस बल को उत्क्षेप बल कहते हैं।
  • आर्कमिडीज का सिद्धांत:- यदि किसी वस्तु को किसी द्रव में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोया जाता है। तो डूबने पर वस्तु के भार में कमी होती है। वस्तु के धार में यह आभासी कमी, उसके द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होती है।
  • संतुलित अवस्था में तैरने पर वस्तु अपने भार के बराबर द्रव स्थापित करता है। यही प्लावन का नियम है।

मशीन (RRB NTPC Science Notes)

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  • वह यंत्र जिसकी सहायता से थोड़ा बल लगा कर, अधिक बलिया काम को तेजी के साथ किया जा सके, मशीन कहलाता है।
  • लीवर वह छड़ होती है जो एक बिंदु के चारों ओर घूम सकती है। जिस बिंदु के चारों ओर घूमती है उसे आलम्ब कहते हैं। आलम्ब से दूर जहां दबाव डालते हैं उसे शक्ति भुजा कहते हैं।
  • लीवर तीन प्रकार के होते हैं।
  • प्रथम श्रेणी :- इसमें आलम्ब, भार व शक्ति के बीच में होता है। जैसे:- कैची, साइकिल का ब्रेक आदि।
  • द्वितीय श्रेणी:- इसमें भार, आलम्ब, व शक्ति के बीच में होता है। जैसे:- सरौता, पहिया आदि।
  • तृतीय श्रेणी:- इसमें शक्ति, आलम्ब व भार, के बीच में होता है। जैसे:- चिमटा
  • घिरनी, स्टील या लकड़ी की बनी गोल डिस्क होती है। जो एक अक्ष के चारों ओर घूमती है।

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तरंग गति (RRB NTPC Science Notes)

  • ऊर्जा का एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरण तरंगों के माध्यम से होता है।
  • किसी माध्यम में उठे विक्षोभ को यांत्रिक तरंगे कहते हैं। यांत्रिक तरंगे दो प्रकार की होती हैं। (अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य तरंगे)
  • अनुप्रस्थ तरंगे:- जब संचरण शील कण, माध्यम में तरंग के चलने की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं। तो तरंगे अनुप्रस्थ होती हैं।
  • अनुप्रस्थ तरंगे ठोस एवं जल के ऊपरी सतह पर उत्पन्न होती है। यह तरंगे जल के भीतर तथा गैसों में नहीं उत्पन्न होती।
  • अनुदैर्ध्य तरंगें:- जब संचरण शील कण, माध्यम में तरंग के चलने की दिशा के समांतर कंपन करते हैं। तो तरंगे अनुदैर्ध्य तरंगे हैं।
  • यह तरंगे ठोस, द्रव एवं गैस में उत्पन्न होती हैं।
  • चुंबकीय एवं विद्युत क्षेत्र के दोलन से उत्पन्न होने वाली अनुप्रस्थ तरंगे विद्युत चुंबकीय तरंगे कहलाती हैं।
  • ध्वनि की तीव्रता को डेसीबल में मापा जाता है।
  • सबसे कम ध्वनि की तीव्रता मक्खियों के भन-भन आहट (10 से 20 डेसीबल), और सबसे अधिक ध्वनि की तीव्रता मिसाइल की (180 डेसीबल) होती है।
  • जब किसी परावर्तक तल से ध्वनि वापस लौटकर सुनाई देती है। तो इसे प्रतिध्वनि अथवा ईको कहते हैं।
  • वस्तु के दोलन, जिन पर कोई बाहरी पर अपना प्रभाव नहीं डालता। मुक्त दोलन कहलाता है।
  • दोलन कारी वस्तुओं पर कोई ब्याह बल कार्य करता है जो इनके दोलनो को नष्ट करता है, इस बल को अवमंदक बल कहते हैं।
  • किसी मुक्त दोलन करने वाली वस्तु पर कोई बाहरी बल
  • लगाने के कारण दोलन की आवृत्ति बार-बार होती है। तो इस अवस्था को अनुनाद कहते हैं।

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रसायन विज्ञान के नोट्स (RRB NTPC Science Notes)

  • द्रव्य का वर्गीकरण दो प्रकार का होता है। समांगी तथा विषमांगी द्रव।
  • द्रव्य का वह भाग जो किसी भी ज्ञात भौतिक व रासायनिक विधि से, ना तो, दो से अधिक द्रवों में विभाजित किया जा सकता है और ना ही बनाया जा सकता है। तत्व कहलाता है।
  • मानव शरीर में तत्वों की औसत मात्रा ऑक्सीजन 65%, कार्बन 18%, हाइड्रोजन 10%, तथा अन्य तत्व उपस्थित हैं।
  • मिश्रण में उपस्थित घटकों को पृथक करने के लिए प्रयुक्त की जाने वाली विधियां (क्रिस्टलन, आसवन, उर्ध्वपातन, प्रभाजी आसवन, वर्ण लेखन, तथा भाप आसवन) है।
  • क्रिस्टलन विधि द्वारा अकार्बनिक ठोसों को पृथक एवं शुद्धिकरण किया जाता है।
  • आसवन विधि के द्वारा तरल मिश्रण को अलग किया जाता है।
  • उर्ध्वपातन विधि द्वारा दो अलग-अलग प्रकार के ठोस पदार्थों को अलग किया जाता है।
  • जब कोई ठोस, द्रव में परिक्षेपित होकर कोलाइडी विलियन बनाता है। तो वहां साल कहलाता है।
  • जब कोई द्रव , किसी ठोस में परिक्षेपित होकर कोलाइडी विलयन बनाता है तो वह जेल कहलाता है।
  • कोलाइडी विलियन के प्रकाश के प्रकीर्णन को टिंडल प्रभाव कहते हैं।
  • द्रव्य के गति आणविक सिद्धांत के अनुसार द्रव्य छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होता है। इनाडु कहते हैं।
  • परमाणु तत्व का वह छोटा से छोटा कण है। जो किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में भाग ले सकता है। परंतु स्वतंत्र अवस्था में नहीं रह सकता।
  • विद्युत धारा का निर्माण गतिशील इलेक्ट्रॉन से होता है।
  • पाउली के अपवर्जन के नियम के अनुसार, दिए गए परमाणु में किन्ही दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारो क्वांटम संख्याओं का मान , समान नहीं हो सकता है।
  • हुंड का अधिकतम बहुलता का नियम के अनुसार, इलेक्ट्रॉन तब तक युग्मित नहीं होते जब तक रिक्त कक्षक उपस्थित हैं। अर्थात जब तक संभव है इलेक्ट्रॉन अयुग्मित रहते हैं।
  • परमाणु क्रमांक की खोज मोल्जे ने की थी। जो किसी तत्व के परमाणु में उपस्थित प्रोटानो तथा इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है।
  • परमाणु की त्रिज्या का मात्रक फर्मी होता है।
  • फोटान, यह ऊर्जा के बंडल हैं, जो प्रकाश की चाल से चलते हैं। सभी प्रकार की विद्युत चुंबक की किरणों का निर्माण इन्हीं मूल कणों से होता है। इनका विराम द्रव्यमान शून्य होता है।
  • आर्गन की खोज रेमजे ने की थी। यह कम ताप चालकता, निष्क्रिय प्रकृति के कारण प्रकाश बल्ब व ताप दीप्ति लैंपो में भरने के काम में आती है।
  • हाइड्रोजन की खोज एच. कैवेण्डिस ने की थी।
  • ऑक्सीजन की खोज शीले व प्रीस्टले ने की थी।
  • नाइट्रोजन की खोज रदरफोर्ड ने की थी।
  • सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व फ्लोरीन है।
  • सर्वाधिक विद्युत धनात्मक तत्व पोटैशियम है।
  • सोडियम, पोटेशियम हल्की धातुये हैं।
  • कॉपर, निकिल, जिंक का उपयोग आजकल सिक्के बनाने में किया जाता है।
  • सीमेंट में कैल्शियम ऑक्साइड, सिलिकॉन डाइऑक्साइड, एलमुनियम ऑक्साइड और अल्प मात्रा में आयरन ऑक्साइड होता है।
  • सिक्का धातु में 75% को परवाह 25% निकिल होता है।
  • pH scale की खोज सोरेन्सन ने की थी।
  • प्रोड्यूसर गैस में मुख्यता नाइट्रोजन व कार्बन मोनोऑक्साइड पाया जाता है।
  • कोल गैस में हाइड्रोजन 54%, अमोनिया 35%, कोबाल्ट 11%, हाइड्रोकार्बन 5% तथा अन्य गैस उपस्थित होती है।
  • मेथिल आइसोसाइनेट को मिक गैस कहते हैं। यह अत्यंत विषैली गैस है।
  • एथिलीन गैस का उपयोग कच्चे फलों को पकाने में किया जाता है।
  • सोडियम हाइड्रोक्साइड का प्रयोग सूती कपड़ों में चमक पैदा करने के लिए किया जाता है।

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जीव विज्ञान के नोट्स (RRB NTPC Science Notes)

  • हिप्पोक्रेट्स को चिकित्सा शास्त्र का जनक माना जाता है।
  • अरस्तु को जंतु विज्ञान का जनक माना जाता है।
  • थियोफ्रेटस को वनस्पति विज्ञान का जनक माना जाता है।
  • प्रत्येक सजीव जीव धारियों में स्वसन, पोषण, प्रजनन, अनुकूलन, गति, संवेदनशीलता, उपापचय, जीवन चक्र, जीवद्रव्य, उत्सर्जन तथा वृद्धि पाई जाती है।
  • आर. एच. ह्वीटेकर ने जीव धारियों को 5 जगत में विभाजित किया है। जो निम्न है ( मोनेरा- नीले हरे शैवाल, प्रोटिस्टा- अमीबा, प्लांटी- पेड़ पौधे, कवक, और एनिमलिया)
  • एक कोशिकीय सुषमा दर्शी जीवो को प्रोटोजोआ संघ में रखा गया है। जैसे अमीबा, यूग्लीना, पैरामीशियम आदि।
  • जीना जीव धारियों के संपूर्ण शरीर में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। उन्हें पोरिफेरा संघ में रखा गया है। जैसे ल्यूकोसोलेनिया आदि।
  • ऐसे बहुकोशिकीय जीव जिनकी सममित आर्य होती है और यह स्वस्थ तथा कार्य जल में पाए जाते हैं। सीलेंट्रेटा संघ में रखे गए हैं। जैसे:- हाइड्रा, ओबेलिया आदि।
  • प्लेटीहेलमाइंथेस संघ के जियो परजीवी होते हैं। जैसे फेसियोला हीपेटिका, टिनिया सोलेनियम आदि।
  • आर्थोपोडा संसार का सबसे बड़ा संघ है। इस संघ में लगभग 80% से अधिक जीवधारी होते हैं। जैसे, कीट, पंछी, जल में रहने वाले जंतु, स्थल पर रहने वाले जंतु आदि।
  • रोग फैलाने वाले की जैसे घरेलू मक्खी- हैजा, अतिसार, सूजाक, तपेदिक, टाइफाइड आदि,। मच्छर:- मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, पीत ज्वर आदि। सैंड फ्लाई:- कालाजार, फोड़े का रोग आदि। खटमल:- टाइफस, कोढ़ आदि।
  • किसी भी जीव की सबसे छोटी इकाई कोशिका होती है। कोशिका को संख्या / रचना के आधार पर प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक में बांटा गया है।
  • सबसे छोटी कोशिका माइकोप्लाज्मा तथा सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग के अंडे की होती है।
  • पौधों में भोज पदार्थ संग्रह करने वाले लगभग अवर्णी लवक तथा फूल एवं पत्तियों को रंग प्रदान करने वाले वर्णी लवक कहलाते हैं।
  • कोशिका का मुख्य भाग केंद्रक होता है। इस भाग में डीएनए तथा आर एन ए उपस्थित होते हैं।
  • कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहते हैं। ऊतक के अध्ययन को ऊतिकी कहते हैं।
  • त्वचा, आमाशय, आत, पित्ताशय, ह्रदय, आदि का बाहरी आवरण उपकला ऊतक से बना होता है।
  • रक्त की उत्पत्ति मेसोडर्म से हुई है। रक्त में प्लाज्मा तथा रुधिराणु उपस्थित होते हैं।

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