भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएं-पूरी जानकारी-प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए

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मैं महसूस करता हूं कि संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों ना हो, यदि वे लोग जिन्हें संविधान को अमल में लाने का काम सौंपा जाए, खराब निकले तो निश्चित रूप से संविधान भी खराब सिद्ध होगा| दूसरी ओर, संविधान चाहे कितना भी खराब क्यों ना हो, यदि वे लोग जिन्हें संविधान को अमल में लाने का काम सौंपा जाए, अच्छे हो तो संविधान अच्छा सिद्ध होगा|डॉ० आंबेडकर

भारत का संविधान उसकी सभ्यता,संस्कृति एवं शासन व्यवस्था का दर्पण है यह जन-जन की आशाओं एवं आकांक्षाओं का एक पवित्र दस्तावेज (Holy Document) है| हमारा संविधान अपने आप में कई विशेषताओं को समेटे हुए हैं| इसमें विश्व की लगभग सभी संविधान की विशेषताएं समाहित हैं| भारत के संविधान की निम्नलिखित विशेषताएं हैं-

भारतीय संविधान -सबसे लंबा लिखित संविधान (Larg Written Constitution)-

भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है| जहां अमेरिकी संविधान में कुल 7 अनुच्छेद, कनाडा के संविधान में 147, ऑस्ट्रेलिया के संविधान में, 128 दक्षिण अफ्रीका के संविधान में 153, स्विट्जरलैंड के संविधान में 123, तथा जापान के संविधान में 103 अनुच्छेद है, वही भारत मूल संविधान में 395 अनुच्छेद (22 भागों में विभक्त) 8 अनुसूचियां तथा एक प्रस्तावना शामिल है| इस संविधान का अभी भी विस्तार हो रहा है वर्तमान में इस संविधान में गणना के हिसाब से कुल 450 अनुच्छेद (24 भागों में विभक्त) तथा 12 अनुसूचियां, एक प्रस्तावना तथा 5 परिशिष्ट हैं| भारतीय संविधान कितना विस्तृत है इसकी जानकारी इस बात से सम मिलती है कि जहां अमेरिका के संविधान में लगभग 4500 शब्द हैं वहीं भारतीय संविधान में कुल 177369 शब्द शामिल हैं| विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय संविधान की विशालता का मुख्य कारण उसका विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र (लगभग 32,87,263 वर्ग किलोमीटर), केंद्र तथा राज्यों के लिए एक ही संविधान जातिगत एवं भाषागत विशेषताएं (लगभग 2000 जातियां एवं 45,000 उपजातियां तथा 1652 भाषाएं) तथा संविधान सभा में वकीलों की अधिक संख्या एवं प्रभाव का होना है|

भारतीय संविधान-अनम्यता और नम्यता का मिश्रण (Mixture Of Rigidity and Flexibility)-

भारतीय संविधान अमेरिका फ्रांस जापान स्विट्जरलैंड की तरह ना तो बहुत कठोर है और ना ही ब्रिटेन तथा इजरायल की तरह बहुत लचीला वस्तुतः यह यह अनम्यता और नम्यता (Rigidity and Flexibility) का विचित्र मिश्रण है| जहां भारत के संविधान में राष्ट्रपति का चुनाव (अनुच्छेद 54 और 55) संघ और राज्यों की कार्यपालिका शक्ति (अनुच्छेद 73 और 162) तथा संविधान संशोधन की प्रक्रिया (अनुच्छेद 368) अनम्यता के गुण को प्रदर्शित करते हैं, वही नए राज्यों का निर्माण तथा उसकी सीमाओं में परिवर्तन तथा नागरिकता जैसे प्रावधानों का संशोधन, जो साधारण बहुमत के द्वारा हो जाते हैं, भारत के संविधान की नम्यता के गुड़ का प्रदर्शन करते हैं| जहां अमेरिका के संविधान में पिछले 225 वर्ष में मात्र 27 संशोधन तथा ऑस्ट्रेलिया के संविधान में 110 वर्षो में 8 संशोधन किए गए हैं वहीं भारत के संविधान में 2017 तक 122 संविधान संशोधन किए जा चुके हैं|

भारतीय संविधान-विभिन्न स्रोतों से निर्मित संविधान (Drawn from various sources)-

भारतीय संविधान के आलोचक भारतीय संविधान को कई नामों जैसे-उधार का संविधान, कैची-गोद का संविधान तथा प्रबंध का संविधान इत्यादि से अभिहित करते हैं| इसका मुख्य कारण भारतीय संविधान के निर्माण में लगभग 250 अनुच्छेदों को भारत सरकार अधिनियम 1935 से लिया जाना है| इसके अतिरिक्त 60 विश्व के संविधान के प्रावधानों को भी इस में जोड़ने का कार्य किया गया है| बी. आर. अंबेडकर के अनुसार आज के 200 साल पहले केवल अमेरिका का संविधान मौलिक संविधान के रुप में प्रस्तुत हुआ तथा बाद का संविधान अमेरिका के संविधान की नकल मात्र है| भारत का संविधान निश्चित रूप से एक पेबंद का कार्य है लेकिन यह दुनिया का श्रेष्ठ पेबंद है|

भारतीय संविधान में विभिन्न देशों से लिए गए प्रावधान

ब्रिटेन संसदीय व्यवस्था, सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत, संसदीय विशेषाधिकार, एकल नागरिकता, विधायिका के अध्यक्ष का पद, नाम मात्र तथा वास्तविक कार्यपालिका, विधि निर्माण प्रक्रिया, द्विसदनात्मक प्रणाली, दैहिक स्वतंत्रता का सिद्धांत, बंदी प्रत्यक्षीकरण के लिए न्यायिक रिट का प्रावधान|
अमेरिका संघीय व्यवस्था, उपराष्ट्रपति का पद, न्यायिक पुनरावलोकन, स्वतंत्र न्यायपालिका, संविधान की सर्वोच्चता, राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया|
आयरलैंड नीति निदेशक तत्व, राष्ट्रपति के निर्वाचन में निर्वाचक मंडल की व्यवस्था, राज्यसभा में कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा आदि से संबंधित विशिष्ट व्यक्तियों के मनोनयन की प्रणाली|
कनाडा संघात्मक व्यवस्था तथा केंद्र के पास अवशिष्ट शक्तियां|
जर्मनी आपदा प्रबंध
रूस मूल कर्तव्य आयोजन|
फ्रांस निर्वाचित राष्ट्रपति का प्रावधान|
जापान अनुच्छेद 21 का शब्द “कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया को छोड़कर”|
ऑस्ट्रेलिया संविधान की प्रस्तावना में निहित भावनाएं समवर्ती सूची
द० अफ्रीका संविधान की संशोधन पद्धती|

एकल नागरिकता (Single Citizenship)-

अमेरिका, स्विटजरलैंड, कनाडा आदि देशों की तरह भारत में दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) का प्रावधान नहीं है| भारतीय संविधान ब्रिटेन, फ्रांस, चीन इत्यादि देशों की तरह भारतीयों के लिए एकल नागरिकता का प्रावधान करता है| विश्व में लगभग 90 देशों में दोहरी नागरिकता का प्रावधान है जिसमें व्यक्ति एक ही साथ दो देशों की नागरिकता रख सकता है| दिसंबर 2005 से अप्रवासी भारतीयों तथा भारतीय मूल के व्यक्तियों को दी जानेवाली समुंद्र पारी नागरिकता किसी भी प्रकार से दोहरी नागरिकता नहीं है, क्योंकि समुंद्र पारी नागरिकता प्राप्त व्यक्ति को भारत में किसी भी प्रकार का राजनीतिक तथा सार्वजनिक पदों को प्राप्त करने का अधिकार प्रदान नहीं किया गया है|

भारतीय संविधान-संघात्मक और एकात्मक तत्वों का मिश्रण (Mixture of fedral and unitary elements)-

यदि भारत का संविधान शांतिकाल में संघात्मक है तो संकटकाल में यह एकात्मक रूप धारण कर लेता है| भारत संविधान का लिखित, निर्मित एवं कठोर स्वरुप: संविधान की सर्वोच्चता: केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का बंटवारा, स्वतंत्रता नए पालिका आदेश के संघात्मक स्वरूप की विशेषताएं हैं| जहां पर एकात्मक स्वरूप (unitary government) का सवाल है इसकी झलक (glimpses)भारतीय संविधान के निम्नलिखित प्रावधानों में मिलते हैं|

  • अनुच्छेद 249 में राज्य सभा को राज्य सूची (state list) विषयों पर कानून बनाने का दिया गया अधिकार
  • अनुच्छेद 365 में राज्य सरकारों को निर्देश देने की शक्ति
  • अनुच्छेद 156 के द्वारा राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत (Pleasure of the president) राज्यपाल का पद ग्रहण करना
  • अनुच्छेद 200 के माध्यम से राज्यपाल के द्वारा प्रांतों के कानूनों को राष्ट्रपति के लिए सुरक्षित रखने का प्रावधान
  • अनुच्छेद 356 के माध्यम से लगाया जाने वाला राष्ट्रपति शासन आदि|

संसदीय सर्वोच्चता और न्यायिक सर्वोच्चता के सिद्धांतों का मध्यमार्ग-

भारतीय संविधान ब्रिटिश संसदीय सर्वोच्चता और अमेरिकी न्यायिक सर्वोच्चता के सिद्धांतों का मध्यमार्ग अपनाता है| 1976 के 42वें संवैधानिक संशोधन ने भारत में संसदीय सर्वोच्चता के सिद्धांत को असंदिग्ध एवं निर्विवाद रुप से स्थापित करने का प्रयास किया था, परंतु 1978 के 44 वें संवैधानिक संशोधन ने 42 वें संशोधन से पूर्व की स्थिति को पुनः स्थापित कर दिया है अर्थात न्यायपालिका संसद एवं विधानमंडलों द्वारा पारित कानूनों की संवैधानिकता(Constitutionalism) की जांच कर सकती है| यदि कोई कानून संवैधानिक धाराओं के विपरीत है तो वह उसे अवैध घोषित कर रद्द कर सकती है| दूसरी ओर, संसद न्यायालय के निर्णय को प्रभावहीन बनाने के लिए संविधान में संशोधन कर सकती है|

भारतीय संविधान-संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी, पंथनिरपेक्षता लोकतंत्रात्मक गणराज्य (Sovereign,Socialist,Secular and Democratic Republic)-

भारत का संविधान भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी, पंथनिरपेक्ष तथा लोकतंत्रात्मक गणराज्य स्थापित करता है| संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न शब्द से इस बात का बोध होता है कि भारत अपने आंतरिक और बाह्य मामलों में पूरी तरह स्वतंत्र है वही समाजवादी शब्द ऐसे शासन व्यवस्था को स्थापित करने की बात करता है जिनमें उत्पादन के साधनों का प्रयोग सामाजिक हित में किया जा सके और आर्थिक शोषण का अंत करके हर व्यक्ति को जीवकोपार्जन (Livlihood)की सुविधा दी जा सके|

पंथनिरपेक्ष (Secularism)– शब्द इस बात को सुनिश्चित करता है कि भारत में राज्य का अपना कोई धर्म न होगा लेकिन प्रत्येक व्यक्ति सामाजिक मर्यादाओं के अधीन किसी भी प्रकार के धर्म को मानने के लिए स्वतंत्र होगा|

लोकतंत्रात्मक (Democratism)– शब्द से तात्पर्य समानता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर आधारित स्थापित सरकार से है जो जनता के द्वारा निर्वाचित और जनता के प्रति उत्तरदाई रहती है गणराज्य से तात्पर्य है कि देश का प्रधान जनता द्वारा एक ही निश्चित अवधि के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होगा लेकिन वह वंशानुगत नहीं होगा|

भारतीय संविधान-मूल अधिकार एवं कर्तव्य (Fundamental Rights and Duties)-

भारतीय संविधान के भाग 3 में मूल अधिकारों तथा 4 (क) में कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है| अमेरिका और आयरलैंड के संविधान की भांति भारतीय संविधान भी अपने नागरिकों के मूल अधिकार प्रदान करता है| भारत के मूल संविधान में सात प्रकार के मौलिक अधिकारों का प्रवधान था लेकिन 44वें संविधान संशोधन के माध्यम से संपत्ति के अधिकार के निरसित Delete करने के बाद इसकी संख्या 6 हो गई है| भारतीय नागरिकों के लिए संविधान में कर्तव्यों का भी उल्लेख किया गया है| इस प्रावधान को भारतीय संविधान के भाग 4 (क) में 42वें संविधान संशोधन के द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर शामिल किया गया है यहां उल्लेखनीय है कि भारतीय संविधान में मूल कर्तव्य के यह प्रावधान पूर्व सोवियत संघ के संविधान से लिया गया है|

भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएं (स्मरणीय तथ्य)

  • भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा और विस्तृत संविधान है लेकिन अनुच्छेद के आधार पर यूगोस्लाविया का संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है|
  • भारतीय संविधान भारत में प्रभुत्व संपन्न, लोकतंत्रात्मक, पंथनिरपेक्ष, समाजवादी गणराज्य की स्थापना करता है|
  • प्रभूत संपन्नता से अर्थ है कि भारत का वह नियंत्रण से सर्वथा मुक्त है तथा अपनी आंतरिक एवं विदेशी नीति को स्वयं निर्धारित करता है|
  • भारत लोकतंत्रात्मक राज्य है, क्योंकि देश का प्रशासन जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है|
  • ‘ पंथनिरपेक्ष राज्य’ का तात्पर्य से राज्य से है जो किसी धर्म-विशेष को राजधर्म के रूप में नहीं घोषित करता है वरन सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करता है|
  • ‘समाजवाद’ की कोई निश्चित परिभाषा देना कठिन है साधारण इससे तात्पर्य से व्यवस्था से है| जिसमें उत्पादन के मुख्य साधन राज्य के नियंत्रण में होते हैं लेकिन भारतीय समाजवाद अनूप है| यह ‘मिश्रित अर्थव्यवस्था’ पर बल देता है|
  • भारतीय संविधान में ‘संसदीय ढंग की सरकार’ की स्थापना की है जिसमें वास्तविक शक्ति मंत्रिपरिषद के पास है, जो विधायिका के प्रति उत्तरदाई होता है और उसी के सदस्यों द्वारा निर्मित होता है|
  • भारतीय संविधान ‘संघात्मक व्यवस्था’ की स्थापना करता है, जहां केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है|
  • भारतीय संविधान की एक अन्य विशेषता ‘मौलिक अधिकारों की घोषणा’ है| संविधान के भाग 3 में मौलिक अधिकारों का विस्तृत वर्णन मिलता है|
  • संविधान के भाग 4 में ‘राज्य के नीति निदेशक तत्वों’ का उल्लेख भारतीय संविधान की एक अन्य विशेषता है इन्हें पूरा करना राज्य का पवित्र कर्तव्य माना गया है|
  • भारतीय संविधान नम्यता और अनम्यता का अनोखा मिश्रण है| संविधान के कुछ भागों में परिवर्तन करने के लिए एक विशेष प्रक्रिया का अनुसरण करना पड़ता है जबकि अधिकतर उपबंध संसद द्वारा साधारण विधि पारित करने की परिवर्तित किए जा सकते हैं|

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