What is Fundamental Duties in Indian Constitution

दोस्तों, आज हम आपको भारत के संविधान (Indian Constitution) में लिखे गए भारतीय नागरिकों के प्रति मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) के बारे में आपको जानकारी देंगे| भारत का संविधान 26 जनवरी सन 1950 को जब या पूरे देश में लागू किया गया तब से लेकर अब तक भारतीय नागरिकों के लिए मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) के बारे में कोई उल्लेख नही था| भारत का संविधान डॉक्टर बाबा भीमराव अंबेडकर के द्वारा लिखा गया था| इस संविधान में भारतीय नागरिकों के प्रति अनेक नियमों के बारे में उल्लेख किया गया है| आज के लेख में हम आपको इस संविधान में लिखे गए भारतीय नागरिकों के प्रति मौलिक कर्तव्यों (Fundamental Duties) के बारे में जानकारी देंगे और यह भी बताएंगे कि इन मौलिक कर्तव्यों (Fundamental Duties) में कब और किसके द्वारा संशोधन किया गया था?

What is Fundamental Duties in Indian Constitution

Fundamental duties in Indian constitution

जब भारत का संविधान लिखा गया तब उसमें मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties) के साथ साथ मूल अधिकारों को भी उल्लेख किया गया था| दोनों ही एक दूसरे के पूरक माने जाते हैं| अर्थात किसी अधिकार विहीन कर्तव्य को करना निरर्थक होता है| जबकि बिना किसी कर्तव्य के अधिकार जमाना एक निरंकुशकता पैदा करता है| यदि भारत का कोई नागरिक गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार प्राप्त करता है, तो उसका कर्तव्य भी बनता है कि वह भारत के अन्य नागरिकों के गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का ख्याल रखें| यदि किसी भारतीय नागरिक को स्वतंत्रता प्यारी है, तो यह भी जरूरी है कि, वह दूसरे नागरिकों की स्वतंत्रता के प्रति जागरूक और सजगता बनाए रहे|

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Fundamental duties

भारत के वर्तमान संविधान के भाग 4A के अनुच्छेद 51A में भारत के प्रत्येक नागरिकों के लिए कुल 11 मूल कर्तव्य (Fundamental Duties) है| जो निम्न है-

  1. प्रत्येक नागरिक संविधान का पालन करें और भारतीय राष्ट्रध्वज एवं राष्ट्रगान का आदर करें| इसके अतिरिक्त भारत के सभी आदर्श व्यक्ति एवं संस्थाओं का आदर करें|
  2. भारत की स्वतंत्रत के लिए महान व्यक्तियों के उच्च आदर्शों को अपने दिल में संजोए रखें और उन आदर्शों का पालन करें|
  3. भारत की एकता, अखंडता और उसकी प्रभुता की सदैव रक्षा करें और उसे किसी भी प्रकार की हानि ना पहुंचाएं|
  4. प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि, वह अपने देश की रक्षा करें और आवश्यकता होने पर देश की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहें|
  5. भारत के सभी धर्म, भाषाओं और प्रदेश या वर्ग में रह रहे लोगों के प्रति समान भाव बना रहे और ऐसी प्रथाओं को त्याग करें जो महिलाओं के सम्मान का विरोध करती हो|
  6. प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि, वह भारत की सामाजिक संस्कृति के महत्व को समझें और उसका सदैव परिरक्षण करें|
  7. प्रत्येक नागरिक के दृष्टिकोण में वैज्ञानिक, ज्ञानार्जन और मानववाद जैसी भावनाओं को विकसित करें|
  8. भारत के सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित रखें और अहिंसा का मार्ग अपनाएं|
  9. भारतीय नागरिकों का कर्तव्य है कि, वे सदैव व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों को प्रेरित करें| जिससे राष्ट्र में निरंतर नई उपलब्धियां को ऊंचाइयां मिलती रहे|
  10. भारतीय नागरिक का कर्तव्य है कि, वह प्राकृतिक पर्यावरण, वन, नदी, झील एवं अन्य जंगली जानवरों की रक्षा करें और उनके प्रति सदैव दया भाव रखें|
  11. भारतवर्ष के 6 से 14 वर्ष के आयु के बच्चों को उनके माता-पिता या संरक्षक के द्वारा मुफ्त शिक्षा एवं प्रतिपालक का अवसर दिया जाए|

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भारतीय संविधान के मूल कर्तव्य (Fundamental Duties) का इतिहास

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के द्वारा लिखित भारतीय संविधान में मूल कर्तव्य शामिल नहीं थे| सन 1975 में इंदिरा गांधी के द्वारा आपातकालीन की घोषणा की गई थी| उसी समय सरदार स्वर्ण सिंह के द्वारा संविधान में संशोधन करने का सुझाव प्रस्तुत किया गया, और एक समिति का गठन किया गया| इस समिति में यह सुझाव रखा गया कि भारतीय संविधान में मूल अधिकारों के साथ मूल कर्तव्य (Fundamental Duties) का भी होना आवश्यक है| संविधान में संशोधन के लिए गठित समिति का यह मानना था कि, भारत के लोग अपने अधिकार पर अधिक बल देते हैं| वह यह नहीं समझते कि हर अधिकार किसी ना किसी कर्तव्य के द्वारा ही प्राप्त होता है|

सरदार स्वर्ण सिंह के द्वारा बनाई गई समिति के आधार पर 42 वें संशोधन अधिनियम 1976 के द्वारा संविधान के भाग 4 में एक अन्य भाग 4A जोड़ दिया गया| जिसके अंतर्गत अनुच्छेद 51A में 10 मौलिक कर्तव्यों (Fundamental Duties) का उल्लेख किया गया| इस संविधान में एक बार फिर से सन 2002 में 86वे संशोधन अधिनियम 2002 के द्वारा संविधान के मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties) में एक कर्तव्य और जोड़ दिया गया |जिसके अनुसार भारत के 6 से 14 वर्ष के आयु के बच्चों को उनके माता-पिता के द्वारा मुफ्त शिक्षा का अवसर प्रदान किया जाए|

भारतीय संविधान के मौलिक कर्तव्यों का सारांश

  • भारत के संविधान में मूल कर्तव्यों का उल्लेख अनुच्छेद 51A में है
  • भाग 4A में भारतीय संविधान के मूल कर्तव्य का उल्लेख है|
  • भारत के संविधान में उल्लेखित मौलिक कर्तव्यों को भूतपूर्व सोवियत संघ के संविधान से लिया गया है|
  • भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को सरदार स्वर्ण सिंह के समिति के द्वारा जोड़ा गया है|
  • सन 1976 में 42वे संविधान संशोधन के अंतर्गत मौलिक कर्तव्यों को शामिल किया गया है|
  • भारतीय संविधान में सन 2002 में 86वे संविधान संशोधन में 11वे मौलिक कर्तव्य को शामिल किया गया है|
  • भारतीय संविधान के सभी मौलिक कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों के लिए ही बनाए गए हैं|

दोस्तों आज हमने भारत के संविधान एवं उनके मौलिक कर्तव्यों के बारे में जानकारी दी| यदि आपको आज का यह लेख पसंद आया हो तो, आप अपनी राय हमारे कमेंट बॉक्स सेक्शन में जरूर बताएं| आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है तथा इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करें|